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प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और उपराष्ट्रपति धनखड़ का महाकुंभ मेला 2025 में दौरा

महाकुंभ मेला 2025 में भारत के शीर्ष नेताओं के दौरे को लेकर तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के महाकुंभ मेला में शामिल होने की उम्मीद है। इन नेताओं के दौरे से पहले प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियाँ तेज़ कर दी गई हैं, ताकि उनकी यात्रा सुचारू और सुरक्षित रूप से सम्पन्न हो सके।

अमित शाह 27 जनवरी को महाकुंभ मेला में होंगे शामिल

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 27 जनवरी को महाकुंभ मेला में हिस्सा लेने के लिए प्रयागराज आ सकते हैं। उनके दौरे के दौरान वह संगम में पवित्र डुबकी लगाने के साथ-साथ गंगा पूजा करेंगे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। गृहमंत्री अमित शाह का यह दौरा सुरक्षा दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, और उनके आगमन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के प्रमुख चौराहों और कार्यक्रम स्थलों पर विशेष निगरानी रखी है।

सुरक्षा तैयारी: गृहमंत्री शाह के दौरे की पृष्ठभूमि

महाकुंभ मेला एक भव्य धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। संगम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से सभी जरूरी उपाय किए गए हैं, और अधिकारियों को सुरक्षा बलों के साथ मिलकर व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

संगम के आसपास के इलाकों में ट्रैफिक नियंत्रण और भक्तों के प्रवाह को व्यवस्थित करने के लिए उपाय किए गए हैं। इसके अलावा, संगम में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। गृहमंत्री के दौरे के दौरान प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि सभी श्रद्धालुओं को सही मार्गदर्शन मिले और उनका अनुभव सकारात्मक हो।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का 1 फरवरी को महाकुंभ मेला दौरा

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का महाकुंभ मेला में हिस्सा लेने का कार्यक्रम 1 फरवरी को है। उपराष्ट्रपति धनखड़ संगम में पवित्र डुबकी लगाने वाले हैं और उनके दौरे को लेकर भी प्रशासनिक तैयारियाँ जारी हैं। उनके साथ कई प्रमुख अधिकारी और मंत्रियों की एक टीम भी होगी, जो मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी।

उपराष्ट्रपति के दौरे की विशेषताएँ

उपराष्ट्रपति के दौरे के दौरान, उनके सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनके संगम तक पहुंचने, पूजा और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेने तक की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन ने व्यापक योजना बनाई है। संगम में श्रद्धालुओं के साथ-साथ नेताओं के आस्थान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित और धार्मिक दृष्टि से भी महत्व रखे।

प्रधानमंत्री मोदी के महाकुंभ दौरे की तारीख 5 फरवरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकुंभ मेला में शामिल होने की उम्मीद 5 फरवरी को जताई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी का दौरा महाकुंभ के पूरे आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, जो धार्मिक दृष्टि से भी अहम होगा। उनका संगम में पवित्र डुबकी लगाने, गंगा पूजा करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का कार्यक्रम हो सकता है।

प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान प्रशासन उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम करेगा। प्रधानमंत्री के आगमन से महाकुंभ मेला का आकर्षण और बढ़ जाएगा, और इसके साथ ही प्रशासन को और भी सख्त सुरक्षा उपायों को लागू करना होगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का महाकुंभ मेला दौरा

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के महाकुंभ मेला में शामिल होने की संभावना 10 फरवरी को जताई जा रही है। राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे के दौरान भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क रहेगा। राष्ट्रपति का यह दौरा भी महाकुंभ के धार्मिक महत्व को बढ़ाने वाला होगा और उनके द्वारा किए गए कार्यक्रमों से मेले की भव्यता में चार चाँद लग सकते हैं।

खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या

महाकुंभ मेला के दौरान यह देखा गया कि घने कोहरे और खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई खास असर नहीं पड़ा। 20 जनवरी तक 88.1 मिलियन से अधिक श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगा चुके हैं। संगम की पवित्रता और महाकुंभ के धार्मिक महत्व के कारण तीर्थयात्रियों का आना जारी है, और आने वाले दिनों में इस संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है।

प्रमुख स्नान तिथियाँ

महाकुंभ मेला 2025 में चार प्रमुख शाही स्नान होने वाले हैं, जिनमें 29 जनवरी को मौनी अमावस्या, 3 फरवरी को बसंत पंचमी, 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि शामिल हैं। इन तिथियों पर लाखों श्रद्धालु संगम में आकर पवित्र स्नान करेंगे। इन स्नान तिथियों पर प्रशासनिक तैयारियाँ और सुरक्षा व्यवस्थाएँ और भी बढ़ा दी जाती हैं, ताकि मेले में आए श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो और उनका अनुभव अच्छा रहे।

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