Uttarakhand

राज्यसभा में नरेश बंसल ने घुसपैठियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की

राज्यसभा में भाजपा सांसद और राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष नरेश बंसल ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उन घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए, जो फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने उन गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात भी की जो घुसपैठियों को भारत लाने और उन्हें फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने का काम कर रहे हैं।

भारत की सीमाओं से सटे देशों से हो रही घुसपैठ

नरेश बंसल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की सीमाओं से सटे देशों से रोहिंग्या मुसलमान और अन्य घुसपैठिए खुफिया रास्तों से देश में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये घुसपैठिए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, बंगाल, असम, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश होते हुए नेपाल की सीमा तक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, बंसल ने यह भी खुलासा किया कि ये घुसपैठिए बंगाल से ट्रेन के जरिए दिल्ली और फिर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, जहां उनकी उपस्थिति सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

उनके अनुसार, यह समस्या केवल सीमावर्ती राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती है। बंसल ने यह भी कहा कि सरकार को इस दिशा में गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि देश में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर काबू पाया जा सके।

नेपाल सीमा पर फंडिंग और सहयोग

बंसल ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बनाते हुए खुलासा किया कि नेपाल सीमा पर बसे रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोग नेपाल जैसे देशों से फंडिंग प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना था कि ये फंडिंग संगठन “रोहिंग्या इस्लामिक संघ नेपाल” जैसे समूहों से प्राप्त की जा रही है। इसके अलावा, भारत में सक्रिय संगठन जैसे “पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया” (PFI) इन घुसपैठियों की मदद कर रहे हैं, जो उनकी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें देश में जड़ें जमा देने में मदद कर रहे हैं।

नरेश बंसल ने आरोप लगाया कि ये संगठनों के बीच एक अवैध नेटवर्क बन चुका है, जो घुसपैठियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराता है, जिससे उनकी गतिविधियां और भी मजबूत हो रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस प्रकार के नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए और इन संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेजों की आपूर्ति

नरेश बंसल ने यह भी जानकारी दी कि घुसपैठिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर भारत में अवैध रूप से बसे हुए हैं। इन दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए दलालों के माध्यम से भारी रकम खर्च की जाती है। उन्होंने बताया कि घुसपैठिए कुछ ही रुपये में भारत के नागरिकता से जुड़े दस्तावेज प्राप्त कर रहे हैं, जैसे निर्वाचन कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट।

बंसल के अनुसार, इन दस्तावेजों की कीमत काफी अलग-अलग है—घुसपैठियों को 3 से 4 हजार रुपये में निर्वाचन कार्ड, 10 हजार रुपये में राशन कार्ड, 25 हजार रुपये में आधार कार्ड और एक लाख रुपये में पासपोर्ट मिल रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से अवैध है और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है, क्योंकि इन दस्तावेजों के माध्यम से घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता से जुड़ी सुविधाएं मिल रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में कड़े कदम

सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कड़े कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि घुसपैठियों की समस्या एक जटिल और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार इसके समाधान के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रही है। बंसल ने कहा, “यह हम सभी के लिए एक चुनौती है, और हमें मिलकर इसे हल करने की दिशा में काम करना होगा।”

उनके अनुसार, यह घुसपैठ केवल एक कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है, जो देश के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि इन घुसपैठियों को हर हाल में उनके देशों में वापस भेजा जाए और उनके अवैध नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।

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