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1984 सिख विरोधी दंगा मामले में दोषी सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में अदालत ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद, सज्जन कुमार ने अपनी सजा में रियायत की अपील की थी। अदालत ने उनकी अपील को खारिज करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा दी। सज्जन कुमार के लिए यह सजा उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आई है, और इससे यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

सज्जन कुमार का दलील: उम्र, बीमारियां और सुधार की संभावना

सज्जन कुमार ने फैसले से ठीक पहले अपनी सजा में रियायत की अपील करते हुए कोर्ट को यह बताया कि वह अब 80 साल के हो चुके हैं और कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कोर्ट में यह दलील दी कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें फांसी की सजा देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा, ”मैं 80 साल का हो चुका हूं और बढ़ती उम्र के साथ कई बीमारियों से जूझ रहा हूं। 2018 से जेल में बंद हूं और इसके बाद से मुझे कोई फरलो या परोल नहीं मिली है।”

उनका कहना था कि 1984 के दंगों के बाद से वह किसी आपराधिक मामले में शामिल नहीं रहे और न ही उनके खिलाफ किसी प्रकार की शिकायत दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जेल में और ट्रायल के दौरान उनका व्यवहार हमेशा ठीक रहा है। उन्होंने अपने सुधार की संभावना का हवाला देते हुए कोर्ट से न्यूनतम सजा देने की अपील की। सज्जन कुमार ने कहा, ”जेल में मेरी कोई शिकायत नहीं रही, और इसलिए मुझे यकीन है कि मेरी सुधार की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

तीन बार सांसद रह चुके सज्जन कुमार ने निर्दोष होने का दावा किया

सज्जन कुमार ने अपनी दलील में यह भी कहा कि वह तीन बार सांसद रहे हैं और समाज के कल्याण के लिए कई परियोजनाओं का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने दावा किया, ”मैं आज भी खुद को निर्दोष मानता हूं। हालांकि, अगर कोर्ट मुझे सजा दे रहा है, तो मैं चाहता हूं कि सजा में मानवीय पहलू को ध्यान में रखा जाए और न्यूनतम सजा दी जाए।”

यह मामला 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा हुआ है, जिसमें सिखों के खिलाफ हिंसा भड़काई गई थी। इस हिंसा में सैकड़ों सिखों की हत्या कर दी गई थी, उनके घरों और व्यापारों को लूटा और जलाया गया था। सज्जन कुमार को इस हिंसा में शामिल होने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। हालांकि उन्होंने हमेशा अपने खिलाफ लगे आरोपों का खंडन किया था और खुद को निर्दोष बताया था।

कोर्ट का फैसला: सज्जन कुमार को उम्रकैद

दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगे मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि सज्जन कुमार की भूमिका इस हिंसा में अहम थी और उन्होंने सिखों के खिलाफ हिंसा भड़काने में मदद की थी। कोर्ट ने कहा कि दंगे में शामिल लोगों को सजा दिलवाना न्याय की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और सजा का उद्देश्य सिर्फ आरोपी को दंडित करना नहीं बल्कि न्याय स्थापित करना भी है।

कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह अपराध सिर्फ व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करने वाला था। इसलिए यह जरूरी था कि उन्हें कड़ी सजा दी जाए। हालांकि, सज्जन कुमार की उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस फैसले में कुछ नरमी दिखाई, लेकिन फिर भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

1984 सिख विरोधी दंगों का इतिहास

1984 के सिख विरोधी दंगे भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और विवादास्पद घटनाओं में से एक हैं। यह दंगे उस समय हुए जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में सिखों के खिलाफ हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान सिखों के घरों और दुकानों को जलाया गया, उनके परिवारों को निशाना बनाया गया, और सिखों के खिलाफ भयानक हिंसा की गई। इस हिंसा के परिणामस्वरूप सैकड़ों सिखों की हत्या हुई, और हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए।

1984 के इन दंगों के लिए कई नेताओं और अधिकारियों पर आरोप लगे थे, जिनमें सज्जन कुमार का नाम प्रमुख था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सज्जन कुमार ने दंगों के दौरान सिखों के खिलाफ हिंसा भड़काने में मदद की और उनका समर्थन किया। इसके बाद कई सालों तक इस मामले की जांच चलती रही, लेकिन 2018 में इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई और सज्जन कुमार को दोषी ठहराया गया।

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