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दिल्ली विधानसभा चुनाव भाजपा को बहुमत की ओर, मुख्यमंत्री के चेहरे पर सस्पेंस

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलती दिख रही है। इस बीच, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर भाजपा बहुमत हासिल करती है, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवारों के बारे में।

1. प्रवेश वर्मा: भाजपा का जाट चेहरे का कार्ड

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री चेहरों में सबसे प्रमुख नाम प्रवेश वर्मा का है। प्रवेश वर्मा का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को हराने का बड़ा मौका हासिल करेंगे। अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी का चेहरा हैं और उन्हें हराने का मतलब भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोकने का मजबूत आधार बन सकता है।

प्रवेश वर्मा जाट समुदाय से आते हैं, और उनके माध्यम से भाजपा दिल्ली और हरियाणा के जाट वोटरों को साधने में कामयाब हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में जाट समुदाय का एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है, जिसे भाजपा अपने पक्ष में कर सकती है। वर्मा के बयानों से भी यह संकेत मिलते हैं कि वह भाजपा के जाट वोटरों को अपने साथ जोड़ने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था, “दिल्ली के जाट नेता, भाई-बहन भाजपा के साथ हैं। दिल्ली का विकास केवल भाजपा ही कर सकती है। जहां तक जाट रिजर्वेशन की बात है तो इसके लिए राज्य सरकार को सदन से कानून पास करके केंद्र को भेजना होता है, जो उन्होंने कभी नहीं किया। अरविंद केजरीवाल लगातार झूठ बोल रहे हैं।”

2. रमेश बिधूड़ी: गुर्जर समुदाय का चेहरा

भा.ज.पा. के कालकाजी से उम्मीदवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश बिधूड़ी का नाम भी मुख्यमंत्री की दौड़ में है। रमेश बिधूड़ी गुर्जर समुदाय से आते हैं और अपने समुदाय में उनका एक खास स्थान है। भाजपा के भीतर अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए बिधूड़ी का नाम भी चर्चा में है।

भा.ज.पा. के मुख्यमंत्री चेहरे के बारे में बात करते हुए, बिधूड़ी ने कहा था कि जब अरविंद केजरीवाल ने अपने आप को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताया था, तो उन्होंने इसका जमकर बचाव किया। बिधूड़ी ने कई बार अपने विवादित बयानों से पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई, लेकिन फिर भी पार्टी ने उन्हें कभी नहीं हटाया। चुनाव प्रचार के दौरान बिधूड़ी ने कुछ ऐसे बयान दिए जो पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर सकते थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता और प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। गुर्जर समुदाय के लिए उनके पास विशेष समर्थन हो सकता है, और इसी कारण उनका नाम मुख्यमंत्री के संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा है।

3. दुष्यंत गौतम: एससी वोटर्स और बिहार के चुनाव की रणनीति

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के एक और संभावित चेहरे के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम उभर कर सामने आ रहा है। वह दिल्ली के करोल बाग से भाजपा के उम्मीदवार हैं, और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुष्यंत गौतम भाजपा के ऐसे उम्मीदवार हो सकते हैं, जो सभी को चौंका सकते हैं।

गौतम का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि भाजपा एससी (अनुसूचित जाति) वोटरों को साधने के लिए उन्हें उम्मीदवार बना सकती है। यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वह बिहार के आगामी चुनावों को भी ध्यान में रखकर कदम उठा सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के भीतर एससी समुदाय से कोई भी मुख्यमंत्री नहीं है, और गौतम के जरिए पार्टी एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की योजना बना सकती है। एससी समुदाय के बीच उनकी पैठ को देखते हुए दुष्यंत गौतम को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है।

4. विजेंदर गुप्ता: भाजपा का वरिष्ठ चेहरा

दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजेंदर गुप्ता का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए लिया जा रहा है। गुप्ता भाजपा के एक प्रमुख और अनुभवी नेता हैं जिन्होंने विधानसभा में पार्टी की रणनीति को सही दिशा में आगे बढ़ाया है। गुप्ता का नाम विशेष रूप से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ उनकी मुखर आलोचनाओं की वजह से चर्चा में है।

गुप्ता का चुनावी प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। वह रोहिणी से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और इस बार भी उनकी स्थिति मजबूत दिख रही है। 2020 में, जब भाजपा को केवल आठ सीटें मिली थीं, तो गुप्ता अपनी सीट जीतने में सफल रहे थे। अब, जब भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है, तो गुप्ता को मुख्यमंत्री के रूप में एक अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।

भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर एक बड़ा सवाल

भा.ज.पा. के संभावित मुख्यमंत्री चेहरों को लेकर जो चर्चा चल रही है, उसमें एक अहम सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा दिल्ली में भी अपनी परंपराओं के मुताबिक किसी बड़े नाम को सामने लाएगी या फिर किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाएगी? राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि भाजपा दिल्ली में एक नया चेहरा पेश कर सकती है जो सभी को चौंका दे।

यह स्पष्ट है कि भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए कई संभावनाओं को खुला रखा है, और हर उम्मीदवार के पास अपनी अलग रणनीति और समुदाय का समर्थन है। भाजपा के पास जाट, गुर्जर, और एससी समुदाय के बीच अपने प्रभाव को मजबूत करने के लिए कई विकल्प हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व के लिए जो भी चेहरा सामने आएगा, उसकी चुनौती केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के मजबूत नेतृत्व के खिलाफ होगी। 2020 में भाजपा को सिर्फ आठ सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार चुनावी नतीजों से यह प्रतीत हो रहा है कि भाजपा को कुछ बड़ा हासिल हो सकता है।

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