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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन भारतीय राजनीति की शख्सियत सन्नाटे में समा गई

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के नायक, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जिनकी सादगी और शांति के लिए पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। 92 वर्ष की आयु में गुरुवार रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने देशभर में शोक की लहर दौड़ा दी है।

1. एक अविस्मरणीय राजनीतिक यात्रा

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन भारतीय राजनीति की एक अनमोल धरोहर था। वे एक ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने न केवल देश की आर्थ‍िक दिशा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि राजनीति की गहरी समझ और संयमित संवाद शैली के कारण भी वे जनता के दिलों में बसे रहे। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक सुधारों की दिशा में कई ऐतिहासिक कदम उठाए, जिनमें 1991 में भारत की आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत प्रमुख थी। उनकी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना दिया और उनकी सूझबूझ ने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाने में मदद की।

डॉ. सिंह की राजनीति हमेशा विनम्र, विचारशील और कूटनीतिक रही है। वे कम बोलने वाले, लेकिन जब बोलते थे तो उनके शब्दों में गहरी समझ और दूरदृष्टि होती थी। उनके नेतृत्व में भारत ने कई वैश्विक संकटों का सामना किया, और उन्होंने हमेशा संयम, परिपक्वता और समझदारी से अपने निर्णय लिए।

2. दिल्ली के निगम बोध घाट पर आज अंतिम संस्कार

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार आज दिल्ली के निगम बोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत देशभर के कई प्रमुख नेता और विशिष्ट व्यक्ति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मौजूद होंगे। उनका निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है।

गुरुवार रात 92 वर्ष की आयु में दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस लेने के बाद, उनके निधन की जानकारी जैसे ही सार्वजनिक हुई, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। उनके परिवार के सदस्य और करीबी लोग पहले से ही एम्स अस्पताल में मौजूद थे। डॉ. सिंह का स्वास्थ्य कुछ दिनों से नाजुक था, लेकिन उनका निधन हर किसी के लिए एक अपूर्व शोक की घड़ी है।

3. प्रमुख नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का सिलसिला शुक्रवार को उनके निवास स्थान से शुरू हुआ। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, और अन्य प्रमुख राजनीतिक नेता शामिल हुए।

कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी निगम बोध घाट पर जाकर डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर उन्हें एक सम्मानजनक विदाई दी और उनकी राजनीतिक योगदान को याद किया।

4. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी जताई श्रद्धांजलि

भारत ही नहीं, बल्कि विश्व भर में डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को सराहा गया। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और मॉरीशस के विदेश मंत्री मनीष गोबिन भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे। इन नेताओं ने डॉ. सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को साझा करते हुए उन्हें एक महान नेता और एक सच्चे दोस्त के रूप में याद किया।

राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा स्रोत थे। उनके नेतृत्व में भारत ने जो प्रगति की, वह सर्वविदित है। हम उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकते।”

5. डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक करियर

मनमोहन सिंह का राजनीतिक करियर बेहद समृद्ध और विविधतापूर्ण था। वे पहले भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे और बाद में भारत के वित्त मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनके द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी, और भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर एक मजबूत स्थान दिलाया।

उनकी सबसे बड़ी पहचान 1991 में भारत के वित्त मंत्री रहते हुए लागू किए गए आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के सुधारों से जुड़ी है। इन नीतियों ने भारत की आर्थिक दर को तेजी से बढ़ाया और देश को विदेशी निवेश के लिए एक आकर्षक स्थल बना दिया।

6. शख्सियत का अंतिम संक्षिप्त परिचय

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से थे, लेकिन शिक्षा और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने राजनीति में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उनके पास उच्च शिक्षा की डिग्री थी और उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने ओक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी.फिल (PhD) की डिग्री प्राप्त की।

मनमोहन सिंह की राजनीति हमेशा भारतीय लोकतंत्र की सादगी और संयम की मिसाल रही। वे कभी भी विवादों में नहीं पड़े, लेकिन उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

7. अंतिम शब्द

डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से भारतीय राजनीति में एक शून्य उत्पन्न हो गया है जिसे भर पाना मुश्किल होगा। उनके योगदान, उनकी नीतियों और उनके नेतृत्व की यादें हमेशा जीवित रहेंगी। आज जब पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है, हम सब उनके योगदान को हमेशा सम्मान देंगे। वे भारतीय राजनीति के सबसे बड़े और सम्मानित नेताओं में से एक थे, और उनके जीवन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

उनकी शांति और विनम्रता की छवि हमेशा भारतीय राजनीति के इतिहास में एक आदर्श के रूप में रहेगी।

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