दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार का आखिरी दिन, सभी दलों ने जोर-शोर से की तैयारियां

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए प्रचार का अंतिम दिन सोमवार (3 फरवरी) को समाप्त होगा। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने आखिरी दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), आम आदमी पार्टी (आप), और कांग्रेस ने दिल्ली की सड़कों पर अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए रोड शो, रैलियां और डिजिटल अभियानों का सहारा लिया है।
बीजेपी का महा रोड शो और रैलियों का आयोजन
भारतीय जनता पार्टी, जो 25 साल बाद दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है, ने अपने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन समूची दिल्ली में 22 रोड शो और रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है। बीजेपी का यह प्रयास दिल्ली में अपनी खोई हुई स्थिति को फिर से हासिल करने के लिए एक जोरदार कदम है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार इन रैलियों में शामिल होकर दिल्ली की जनता को अपनी योजनाओं और दृष्टिकोण से प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
‘आप’ का भरोसा मुफ्त योजनाओं पर
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) को तीसरी बार सत्ता में आने का विश्वास है। पार्टी ने इस चुनाव में अपनी मुफ्त कल्याणकारी योजनाओं को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है। “आप” ने दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य, और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार को अपने मुख्य एजेंडे के रूप में प्रस्तुत किया है। पार्टी के प्रचार अभियान में कई रैलियां और रोड शो शामिल हैं, जिसमें पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं ने जनता से समर्थन की अपील की है।
कांग्रेस की जमीनी प्रयासों पर जोर
कांग्रेस, जो 2013 तक दिल्ली में 15 साल तक सत्ता में रही थी, पिछले दो विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई है। इस बार पार्टी अपने आधार को फिर से मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रचार कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने हाल के दिनों में केजरीवाल और मोदी सरकार के खिलाफ कई बयानबाजी की है और जनता से कांग्रेस के पक्ष में वोट करने की अपील की है।
कृत्रिम मेधा (AI) का चुनावी प्रचार में इस्तेमाल
इस चुनाव में कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल एक नया और प्रमुख पहलू बनकर उभरा है। सभी प्रमुख दलों ने एआई तकनीक से तैयार किए गए पोस्टर, मीम्स और डिजिटल अभियानों के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाई। “आप” ने बीजेपी को ‘भारतीय झूठ पार्टी’ और ‘गाली गलौज पार्टी’ कहा तो वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आप’ को ‘आप-दा’ और अरविंद केजरीवाल को ‘घोषणा मंत्री’ करार दिया। कांग्रेस ने भी अपनी ओर से कई बयान दिए और केजरीवाल को ‘फर्जी’ तथा मोदी को ‘छोटा रिचार्ज’ जैसे शब्दों से निशाना बनाया।
इस बार चुनावी लड़ाई में मीम्स और डिजिटल अभियानों का बोलबाला रहा, जिससे दिल्ली की चुनावी राजनीति में एक नया पन्ना जुड़ गया है।
चुनाव प्रचार के नियम और आचार संहिता
निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के तहत चुनाव प्रचार को मतदान से 48 घंटे पहले बंद करने का आदेश दिया है। इस कारण सोमवार शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, किसी भी तरह का चुनावी प्रचार, जैसे रैलियां या सभा आयोजित नहीं की जा सकतीं। इसके अलावा, सिनेमा, टीवी, और प्रिंट मीडिया के माध्यम से चुनावी प्रचार सामग्री का प्रसार भी प्रतिबंधित किया जाएगा।
मतदान केंद्र और मतदाता
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 13,766 मतदान केंद्रों पर कुल 1.56 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 83.76 लाख पुरुष, 72.36 लाख महिलाएं और 1,267 थर्ड जेंडर के मतदाता शामिल हैं। दिव्यांगजनों के लिए विशेष मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनकी संख्या 733 है।
इसके साथ ही, दिल्ली चुनाव में एक नई पहल के रूप में ‘क्यू मैनेजमेंट सिस्टम’ (QMS) ऐप्लिकेशन की शुरुआत की गई है। इस ऐप के जरिए मतदाता मतदान केंद्रों पर वास्तविक समय में मौजूदगी का पता लगा सकते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए मतदान सेवा
निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए घर से मतदान की सुविधा प्रदान की है। 7,553 पात्र मतदाताओं में से 6,980 ने पहले ही अपना वोट डाल दिया है। यह सेवा 24 जनवरी से शुरू हुई थी और 4 फरवरी तक जारी रहेगी, जिससे इन मतदाताओं को मतदान में कोई कठिनाई न हो।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दिल्ली में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। अर्द्धसैनिक बलों की 220 कंपनियां, 19,000 होमगार्ड और दिल्ली पुलिस के 35,626 जवान तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं।
मतदान प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए कुल 21,584 बैलेट यूनिट, 20,692 कंट्रोल यूनिट और 18,943 वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की व्यवस्था की गई है।
2015 और 2020 के चुनाव परिणाम
आप ने 2015 में 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिली थीं और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में आप ने 62 सीटों के साथ फिर से अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की, जबकि भाजपा ने आठ सीटें जीतीं और कांग्रेस एक बार फिर अपना खाता खोलने में नाकाम रही।