लोकसभा ने ‘एक देश, एक चुनाव’ पर गठित संसदीय समिति के कार्यकाल का किया विस्तार

लोकसभा ने मंगलवार को ‘एक देश, एक चुनाव’ विषय पर गठित संसदीय समिति के कार्यकाल को बढ़ाने की मंजूरी दे दी। अब इस समिति का कार्यकाल संसद के मानसून सत्र के अंतिम हफ्ते के पहले दिन तक रहेगा। यह निर्णय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी के द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर लिया गया और इसे ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।
संयुक्त संसदीय समिति का कार्य
‘एक देश, एक चुनाव’ योजना को लेकर अब तक कई पहलुओं पर विचार-विमर्श हो चुका है, लेकिन इस योजना पर आगे बढ़ने से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा करना जरूरी माना जा रहा है। इस संदर्भ में, लोकसभा के महासचिव ने सदन को यह जानकारी दी कि राज्यसभा से एक नए सदस्य को भी संसदीय समिति में शामिल किया गया है। पहले यह समिति 39 सदस्यीय थी, लेकिन अब एक सदस्य का इस्तीफा होने के बाद राज्यसभा से नया सदस्य शामिल किया गया है।
संसदीय समिति में कुल 39 सदस्य होते हैं, जिसमें 27 लोकसभा और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। समिति के सदस्यों का मानना है कि प्रस्तावित कानून पर विस्तृत चर्चा करने के लिए कई और हितधारकों से बातचीत करनी होगी, जिनकी संख्या बड़ी हो सकती है। ऐसे में समिति का कार्य लंबा चलने की संभावना है। यही कारण था कि समिति के कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
संयुक्त संसदीय समिति में नया सदस्य
लोकसभा महासचिव ने यह भी बताया कि वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वी विजयसाई रेड्डी के इस्तीफे के बाद एक पद खाली था। इस रिक्ति को भरने के लिए राज्यसभा से एक नए सदस्य को संसदीय समिति में शामिल किया गया है।
यह समिति, जो पहले से ही 39 सदस्यीय थी, अब अपनी कार्यवाही को और विस्तृत रूप से जारी रखेगी। समिति के सदस्य इस बात पर सहमत हैं कि ‘एक देश, एक चुनाव’ योजना को लागू करने के लिए व्यापक चर्चा और विश्लेषण की आवश्यकता है।
एक देश, एक चुनाव: विधेयक का प्रस्ताव
संसदीय समिति की महत्वपूर्ण भूमिका उस विधेयक पर केंद्रित है, जिसे 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था। यह विधेयक दो प्रमुख संशोधन प्रस्तावों के आधार पर है—संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र (कानून) संशोधन विधेयक। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने के लिए संवैधानिक और कानूनी बदलाव लाना है।
बीते साल 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने इन दोनों विधेयकों को मंजूरी दी थी। हालांकि, लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा इसका विरोध किया गया, जिसके कारण इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था। समिति इस प्रस्ताव पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
समिति की अध्यक्षता और सदस्य
संविधान में बदलाव लाने और संघ राज्य क्षेत्र (कानून) में संशोधन के लिए यह संयुक्त संसदीय समिति कार्य कर रही है। समिति की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, समिति के अन्य प्रमुख सदस्य हैं—पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पुरुषोत्तम रूपाला, मनीष तिवारी, प्रियंका गांधी, सुषमा स्वराज और संबित पात्रा आदि।
इस समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावों के बारे में जो संवैधानिक बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, वे समाज के सभी वर्गों के हित में हों और इसके लिए व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।