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PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक, भारत-अमेरिका संबंधों में नए आयाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयामों की शुरुआत हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और दोनों देशों ने कुछ अहम समझौतों पर सहमति जताई, जिनसे भारत को आर्थिक, रक्षा, और सामरिक दृष्टिकोण से कई लाभ मिलेंगे। इस लेख में हम उन प्रमुख समझौतों की विस्तार से जानकारी देंगे, जो भारत को अमेरिका से प्राप्त होने वाले लाभ की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक में सबसे अहम मुद्दा रक्षा क्षेत्र रहा। दोनों देशों के बीच एक 10 साल का फ्रेमवर्क बनाने पर सहमति बनी, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और भी मजबूत किया जाएगा। इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाएगा, जिसमें जेवलिन एंटी टैंक मिसाइलें, स्ट्राइकर आर्म्ड लड़ाकू वाहन और पी81 नौसैनिक सर्विलांस विमानों जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियां शामिल हैं।

इसके अलावा, भारत और अमेरिका ने इंटरनेशनल ट्रैफिक इन आर्म्स रेगुलेशंस की समीक्षा करने का भी निर्णय लिया, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों के स्थानांतरण को और सुगम बनाया जा सके। इसके अलावा, भारत और अमेरिका ने रेसीप्रोकल डिफेंस अधिग्रहण समझौते पर भी विचार किया, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद कर सकेंगे।

भारत को अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमान की बिक्री की संभावना भी इस मुलाकात में चर्चा का हिस्सा बनी। लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने भी इस पर अपनी सहमति व्यक्त की है और कहा कि वह भारत को एफ-35 लड़ाकू विमान मुहैया कराने को लेकर उत्साहित है। इस फैसले से भारतीय सशस्त्र बलों को और सशक्त किया जाएगा, और सामरिक दृष्टिकोण से यह एक अहम कदम होगा।

समुद्री और रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी

भारत और अमेरिका ने ओटोनॉमस सिस्टम्स इंडस्ट्री अलायंस (ASIA) समझौते की शुरुआत की है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच समुद्र के भीतर सहयोग को बेहतर बनाने और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस के तहत संवेदनशील तकनीकों का विकास किया जाएगा। भारत पहला ऐसा देश है, जिसके साथ अमेरिका समुद्री तकनीक को साझा करेगा। इस साझेदारी में सी पिकेट सर्विलांस सिस्टम, वेब ग्लाइडर अनमैन्ड व्हीकल, लो फ्रीक्वेंसी एक्टिव सोनार्स जैसे उन्नत तकनीकी उपकरणों का विकास किया जाएगा।

व्यापारिक संबंधों को नई दिशा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए। दोनों देशों ने यह लक्ष्य तय किया है कि वे अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाएंगे। इस कदम से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक नई गति आएगी, और भारत को अमेरिका से व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों पर इस साल के अंत तक सहमति बनाई जा सकती है।

तकनीकी क्षेत्र में सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान दोनों देशों ने तकनीकी क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए। “ट्रांसफोर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नॉलोजी” पहल के तहत, दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत दोनों देशों के बीच इस साल के अंत तक एक रोडमैप तैयार किया जाएगा, जो इन तकनीकों के विकास में सहायक होगा।

भारत और अमेरिका के बीच दवाइयों के उत्पादन में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिससे भारत की दवाइयों के निर्यात में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा, नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) और भारत के नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) के बीच उभरती हुई तकनीकों और शोध में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग

ऊर्जा सुरक्षा पर भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई। अमेरिका ने भारत को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी में सदस्यता प्राप्त करने के लिए समर्थन देने का वादा किया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा, दोनों देशों ने नागरिक परमाणु समझौते में सहयोग बढ़ाने की बात की है और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स के विकास और उत्पादन पर भी सहमति बनी है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।

अप्रवासन और कानूनी सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अप्रवासन और कानूनी सहयोग पर भी चर्चा हुई। इस मुद्दे में संयुक्त डिग्री, ऑफशोर कैंपस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विस्तार पर बात की गई। साथ ही, अवैध अप्रवासन, मानव तस्करी, ड्रग तस्करी और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी, और इसके लिए दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर सहयोग सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई।

मुंबई हमले के दोषी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया

इस बैठक में एक और महत्वपूर्ण घोषणा हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी देने की घोषणा की। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे भारत को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गतिविधियों से निपटने में मदद मिलेगी और इसके जरिए दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

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