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दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की तैयारी, मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम पर हो रही हैं चर्चाएं

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सत्ता के गठन की दिशा में पार्टी अपने अगले कदमों पर चर्चा कर रही है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर जोरदार बहस चल रही है, और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के लिए संभावनाएं

दिल्ली विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब राजधानी में अपनी सरकार बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के चयन पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी विधायकों में से किसी एक को मुख्यमंत्री और किसी पूर्वांचल या महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाने की योजना बना सकती है।

पार्टी के भीतर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार, दिल्ली बीजेपी मुख्यमंत्री के पद के लिए अपने विधायकों में से किसी एक को चुन सकती है। वहीं, उपमुख्यमंत्री के पद के लिए भी एक महिला विधायक या पूर्वांचल से संबंधित किसी नेता को चुने जाने की संभावना जताई जा रही है।

महिला विधायकों में किसका नाम सबसे आगे?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद यह चर्चा हो रही है कि बीजेपी महिला मतदाताओं को साधने के लिए महिला उपमुख्यमंत्री नियुक्त कर सकती है। बीजेपी को इस बार दिल्ली में महिलाओं से शानदार समर्थन मिला है। जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 43 प्रतिशत महिलाओं ने बीजेपी को वोट किया है, जो पिछले चुनावों के मुकाबले आठ प्रतिशत ज्यादा है। इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर सकती है।

अगर महिला विधायकों की बात करें तो दिल्ली की शालीमार बाग सीट से रेखा गुप्ता, ग्रेटर कैलाश से शिखा रॉय, नजफगढ़ से नीलम पहलवान और वजीरपुर से पूनम शर्मा विधायक बनी हैं। इन नामों में से रेखा गुप्ता का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। रेखा गुप्ता के पास एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि है और उनके कार्यों की सराहना की जा रही है। यही कारण है कि उनके नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

महिला उपमुख्यमंत्री का नाम चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि बीजेपी इस बार महिला वोटरों को आकर्षित करने के लिए एक कदम आगे बढ़ सकती है। इस तरह की रणनीति से पार्टी को दिल्ली में महिला वोटों को और अधिक मजबूती से हासिल किया जा सकता है।

पूर्वांचल से कौन होगा उपमुख्यमंत्री?

दिल्ली में पूर्वांचल के नेताओं का राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है, और पार्टी पूर्वांचल से किसी नेता को उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर सकती है। इस रेस में कुछ प्रमुख नेता हैं, जिनमें कपिल मिश्रा, अभय वर्मा, पंकज सिंह और चंदन चौधरी का नाम शामिल है।

पूर्वांचल से सबसे मजबूत दावेदार कपिल मिश्रा माने जा रहे हैं। कपिल मिश्रा का कनेक्शन गोरखपुर से है और उनके परिवार का बीजेपी से पुराना नाता रहा है। कपिल मिश्रा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी से की थी, लेकिन बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे। उनकी राजनीतिक स्थिति और कार्यशैली को देखते हुए, वह दिल्ली बीजेपी के भीतर एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

इसी तरह, लक्ष्मी नगर के विधायक अभय वर्मा का नाम भी सामने आया है, क्योंकि उनका कनेक्शन आरएसएस से है और वह पार्टी के पुराने नेता हैं। उनकी पृष्ठभूमि और संगठन में उनकी भूमिका के कारण वह भी इस पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

सिख और जाट समुदाय से नेताओं की दावेदारी

दिल्ली बीजेपी में सिख और जाट समुदाय के नेताओं की भी अहम भूमिका है, और चर्चा है कि इन समुदायों से किसी एक नेता को मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद पर बैठाया जा सकता है।

सिख समुदाय से मनजिंदर सिंह सिरसा, अरविंदर सिंह लवली और तरविंदर सिंह मारवाह का नाम सामने आ रहा है। इन नेताओं का दिल्ली राजनीति में गहरा प्रभाव है, और उनकी वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए, इन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा है। सिख समुदाय में इन नेताओं की छवि एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में बनी हुई है।

जाट समुदाय से प्रवेश वर्मा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे है। उनके पास दिल्ली के जाट समुदाय का समर्थन है, और पार्टी उन्हें इस पद पर देख सकती है। प्रवेश वर्मा का राजनीतिक अनुभव और संगठन में उनकी भूमिका को देखते हुए, वह मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

क्या तय होगा नाम पीएम मोदी के लौटने के बाद?

हालांकि, दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद ही इन पदों पर नामों का ऐलान किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने यह संकेत दिया है कि पीएम मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा के बाद ही दिल्ली सरकार के शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया जाएगा।

इसके अलावा, पार्टी के भीतर इन पदों को लेकर रणनीतिक बातचीत और चर्चा जारी है। बीजेपी का मानना है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के पदों के लिए ऐसे नेताओं को चुना जाना चाहिए जो न केवल पार्टी के लिए सशक्त नेतृत्व प्रदान कर सकें, बल्कि दिल्ली के विभिन्न समुदायों को भी साथ लाकर पार्टी की स्थिति मजबूत कर सकें।

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