वक्फ संशोधन बिल के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का समर्थन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर वक्फ संशोधन बिल के विरोध में आज बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कर रहा है, जिसमें कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों का समर्थन भी मिल रहा है। प्रदर्शनकारी वक्फ बिल को असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ मानते हुए इसके खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
वक्फ संशोधन बिल के विरोध में यह प्रदर्शन तब हुआ है, जब इस पर विवाद बढ़ गया है और विपक्षी पार्टियां व मुस्लिम संगठन इसे लेकर सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। प्रदर्शन में लाखों लोग शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न बैनरों और पोस्टरों के साथ वक्फ बोर्ड को स्वतंत्र रखने की अपील की।
वक्फ बिल पर बनी जेपीसी: जगदंबिका पाल ने किया विरोध का आलोचना
वक्फ संशोधन बिल पर एक जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल कर रहे हैं। उन्होंने इस विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बिल को लेकर हमने सभी मुस्लिम संगठनों से बात की थी, और इस पर छह महीने में 118 बैठकें हुई थीं। इसके बावजूद अब प्रदर्शन क्यों किया जा रहा है, यह सवाल उठता है। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने इस बिल की रिपोर्ट को पढ़ा नहीं है और उनका विरोध बिना किसी ठोस आधार के है।
उन्होंने आगे कहा, “जिन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया है, उन्होंने रिपोर्ट को पढ़ा भी नहीं है। उनका विरोध बेबुनियाद है और वे केवल देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वक्फ बिल, धारा 370 और तीन तलाक के समय भी ऐसे ही अफवाहें फैलाई गई थीं। कानून संसद में बनता है, जंतर-मंतर पर नहीं।”
विरोध का कारण: वक्फ संपत्तियों और बोर्ड की संरचना पर विवाद
वक्फ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म कर देगा और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालेगा। इस बिल में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका, और वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव करने की बातें शामिल हैं, जिसे मुस्लिम समुदाय के कई संगठन अपनी स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं।
वहीं, सरकार का कहना है कि इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना है, ताकि उनका सही इस्तेमाल हो सके और मुस्लिम समाज को फायदा मिल सके।
जेपीसी की रिपोर्ट और विपक्षी आपत्तियां
वक्फ बिल पर बने जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) ने अपनी रिपोर्ट में 14 संशोधनों को मंजूरी दी थी, जो बिल में बदलाव लाने के उद्देश्य से थे। इन संशोधनों में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति, बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी, वक्फ संपत्ति का डिजिटलीकरण, अवैध कब्जे पर रोक लगाने, वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियों में वृद्धि, और सीईओ की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल थे।
हालांकि, रिपोर्ट के बाद विपक्षी सांसदों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये बदलाव वक्फ बोर्ड के कार्यों को असंवैधानिक तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश है और इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन कर सकता है और इसके जरिए सरकार सीधे वक्फ संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।
वक्फ बिल पर सरकार का रुख और मुस्लिम संगठनों की आपत्तियां
वक्फ संशोधन बिल पर सरकार का रुख साफ है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को लोकसभा में पेश किया था और विपक्ष के विरोध के बाद इस पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) का गठन किया था। सरकार का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार और उनकी उचित देखरेख की योजना बनाई गई है।
वहीं, मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म करने की कोशिश है और इसके जरिए वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण को सरकार के हाथों में सौंपा जा रहा है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। इन संगठनों का कहना है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन धार्मिक समुदाय के जिम्मे होना चाहिए, न कि सरकारी हस्तक्षेप का शिकार।
विपक्ष का समर्थन: विभिन्न दलों का प्रदर्शन में भागीदारी
इस बिल के विरोध में केवल मुस्लिम संगठनों की ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों का भी समर्थन देखने को मिला है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया और वक्फ बिल के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया और इसे लागू करने से पहले उनसे कोई संवाद नहीं किया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस बिल पर विचार करते समय मुस्लिम संगठनों और समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद करना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल को लेकर व्यापक स्तर पर विवाद हो चुका है, और इसके बिना किसी ठोस समाधान के लागू किया जाना मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
प्रदर्शनकारियों की मांग: वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता की रक्षा
प्रदर्शनकारी अब यह मांग कर रहे हैं कि वक्फ बोर्ड को अपनी स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर मुस्लिम समुदाय से बात करके कोई ऐसा कानून बनाए, जिससे समुदाय की स्वतंत्रता पर कोई असर न पड़े।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड की संरचना में अवांछनीय बदलाव कर रहा है और इसके जरिए सरकार को वक्फ संपत्तियों का नियंत्रण सौंपने की कोशिश हो रही है। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड को अपने प्रबंधन का अधिकार दिया जाना चाहिए, ताकि मुस्लिम समाज अपने धार्मिक अधिकारों का बेहतर तरीके से संरक्षण कर सके।