PUNJAB : चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव में बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला की जीत, आप और कांग्रेस को झटका

चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में बीजेपी को एक बड़ी जीत हासिल हुई है, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी की उम्मीदवार हरप्रीत कौर बबला ने चुनाव में जीत हासिल की, जबकि आप और कांग्रेस के पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर चुनाव परिणाम को चौंकाने वाला बना दिया।
चुनाव में कुल 36 वोट पड़े थे, जिसमें से बीजेपी को 19 वोट मिले, जो बहुमत का आंकड़ा था। दिलचस्प बात यह रही कि बीजेपी के पास 16 पार्षद हैं, इसके बावजूद अन्य दलों के कुछ पार्षदों द्वारा क्रॉस वोटिंग की गई, जिसके कारण बीजेपी को बहुमत मिला। आम आदमी पार्टी के पास 13 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद थे, और दोनों दलों का गठबंधन बहुमत में था। बावजूद इसके, बीजेपी ने इस चुनाव में जीत दर्ज की।
बीजेपी को मिली जीत, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों की क्रॉस वोटिंग
चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रेम लता को उम्मीदवार बनाया था, जबकि बीजेपी ने हरप्रीत कौर बबला को अपना प्रत्याशी घोषित किया था। हालांकि, क्रॉस वोटिंग के कारण परिणाम चौंकाने वाले रहे। आम आदमी पार्टी के 13 पार्षद और कांग्रेस के 6 पार्षद मिलकर कुल 19 वोट देने के लिए एकजुट थे, लेकिन चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को 19 वोट मिले, जबकि आप उम्मीदवार को 17 वोट ही मिल पाए। इस क्रॉस वोटिंग की वजह से बीजेपी की उम्मीदवार हरप्रीत कौर बबला ने विजय प्राप्त की।
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद थे, जिसमें चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी का एक वोट भी था। इस चुनाव में खास बात यह थी कि हालांकि आप और कांग्रेस के गठबंधन के पास बहुमत था, फिर भी बीजेपी ने मेयर का चुनाव जीत लिया। इस तरह से बीजेपी की जीत ने दोनों प्रमुख विपक्षी दलों को असमंजस में डाल दिया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ चुनाव
चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। आप नेता कुलदीप कुमार ने चुनाव के निष्पक्ष आयोजन की मांग करते हुए कहा था कि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज को पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड जज जयश्री ठाकुर को पर्यवेक्षक नियुक्त किया।
जयश्री ठाकुर की निगरानी में ही यह मेयर चुनाव हुआ, और चुनाव के बाद परिणाम की घोषणा पीठासीन अधिकारी रमणीक सिंह बेदी ने की। चुनाव की प्रक्रिया को लेकर आप द्वारा की गई याचिका ने यह सुनिश्चित किया कि मेयर चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो, और चुनाव के दौरान कोई भी अनियमितता न हो।
पिछली बार भी हुआ था विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा था परिणाम
पिछले साल भी चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव के दौरान काफी हंगामा हुआ था। तब चुनाव परिणाम के बाद विवाद उत्पन्न हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। 20 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव अधिकारी अनिल मसीह के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की थी। चुनाव अधिकारी ने आप और कांग्रेस के उम्मीदवारों को मिले आठ वोट को अमान्य कर दिया था, जिसके कारण बीजेपी के उम्मीदवार की जीत हुई थी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए आठ वोटों को पुनः वैध घोषित किया और आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को मेयर घोषित किया। इस निर्णय ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था।
चुनाव परिणाम के बाद की राजनीतिक हलचल
चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव के परिणाम ने राज्य की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। बीजेपी की जीत से यह साफ हो गया कि पार्टी अपने विपक्षी दलों के बीच फूट डालने में सफल रही है। क्रॉस वोटिंग ने यह सिद्ध कर दिया कि आप और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन जितना मजबूत दिख रहा था, उतना स्थिर नहीं था।
इस चुनाव के परिणामों के बाद, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने अपने पक्ष में वोट जुटाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और दोनों पार्टियों के कुछ पार्षदों को क्रॉस वोटिंग करने के लिए प्रेरित किया। इन आरोपों के बावजूद, बीजेपी ने अपनी जीत का जश्न मनाया और इसे अपने चुनावी रणनीति की सफलता बताया।