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PUNJAB सरकार की नशा तस्करों की संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई से परिवारों में खौफ

पंजाब सरकार द्वारा नशा तस्करों की संपत्ति पर की जा रही बुलडोजर कार्रवाई ने उनके परिवारों के बीच खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ तस्करों के परिजन और जीवनसाथी उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का दरवाजा खटखटा रहे हैं। रोजाना ऐसी याचिकाएं विभिन्न जिलों से दाखिल की जा रही हैं, और दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकांश याचिकाएं तस्करों की घर की महिलाओं द्वारा दाखिल की जा रही हैं।

जालंधर की रज्जी ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार

एक प्रमुख मामला जालंधर निवासी रज्जी से जुड़ा हुआ है। रज्जी ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में बताया कि उसके पति पर एनडीपीएस (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) कानून के तहत मामला चल रहा है। इस मामले के सिलसिले में कुछ अज्ञात लोग उनके घर आए और उनके साथ पुलिस भी मौजूद थी। इन लोगों ने रज्जी के ढाबे को गिरा दिया, जो उनके परिवार के भरण पोषण का एकमात्र जरिया था।

रज्जी ने यह भी कहा कि ढाबा उसके नाम पर था और इसके संचालन में उसके पति का कोई योगदान नहीं था। इसलिए, उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना पूरी तरह से गलत था। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए रज्जी से पूछा कि अगर संपत्ति को नुकसान हुआ है, तो उसे क्या किया जा सकता है। कोर्ट ने याची को यह सलाह दी कि वह सिविल कोर्ट में जाएं और नुकसान की भरपाई के लिए उचित कानूनी उपाय करें।

लुधियाना की राधा देवी की याचिका

दूसरा मामला लुधियाना निवासी राधा देवी से जुड़ा है, जिन्होंने भी अपनी याचिका में हाईकोर्ट से राहत की मांग की। राधा देवी ने बताया कि उनके बेटे को एनडीपीएस के मामले में दोषी करार दिया गया था। उनका घर उनके नाम पर था, और उनके बेटे का इस संपत्ति से कोई संबंध नहीं था। फिर भी, पंजाब सरकार ने उनके घर को अटैच कर लिया।

राधा देवी ने यह भी बताया कि उनके बेटे के खिलाफ दोषी ठहराने के बाद अपील विचाराधीन है, और उन्हें आशंका है कि अब सरकार उनके घर को गिरा सकती है। इस पर पंजाब सरकार ने अदालत को विश्वास दिलाया कि कोई भी कार्रवाई पूरी तरह से कानून के अनुसार ही की जाएगी।

हाईकोर्ट में जारी जनहित याचिका

बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ तस्करों के परिवारों द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल की जा रही याचिकाओं के अतिरिक्त इस विषय पर एक जनहित याचिका भी विचाराधीन है। जनहित याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या सरकार का यह तरीका उचित है, और क्या ऐसे मामलों में परिवारों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सही है।

जनहित याचिका में यह भी मांग की गई है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई परिवार के सदस्य के अपराध के कारण की जा रही है या फिर यह किसी दूसरे तरीके से उचित है।

सरकार की बुलडोजर कार्रवाई और उसकी कानूनी स्थिति

पंजाब सरकार द्वारा नशा तस्करों की संपत्तियों पर की जा रही बुलडोजर कार्रवाई एक प्रमुख कदम है, जिसका उद्देश्य नशे की अवैध गतिविधियों को रोकना और समाज में फैली नशे की समस्या पर काबू पाना है। राज्य सरकार ने इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ अपनी कड़ी नीति का हिस्सा बताया है, जिसके तहत तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है और उन पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं।

हालांकि, इस कदम के खिलाफ तस्करों के परिवारों की ओर से उठ रहे सवाल और याचिकाएं सरकार के इस कदम पर सवाल खड़ा कर रही हैं। विशेष रूप से जब कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है, तो क्या उस व्यक्ति के परिवार के सदस्यों की संपत्ति पर भी ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए, इस सवाल ने कानूनी और सामाजिक बहस को जन्म दिया है।

सरकार का रुख और न्यायपालिका की भूमिका

पंजाब सरकार ने अदालत को यह आश्वासन दिया है कि उसकी द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पूरी तरह से कानून के दायरे में होगी। राज्य सरकार का यह दावा है कि जिन संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए हैं, वे संपत्तियां अवैध रूप से नशे के कारोबार में इस्तेमाल हो रही थीं। सरकार का मानना है कि ऐसी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करना समाज के भले के लिए है, क्योंकि इससे न केवल तस्करी की रोकथाम होगी, बल्कि नशे के कारोबार के लिए तैयार हो रही एक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को भी खत्म किया जा सकेगा।

हालांकि, तस्करों के परिवारों का कहना है कि यह कार्रवाई उनके परिवारों के जीवन में भारी संकट पैदा कर रही है। उनका यह आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के उनके घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से अवैध और अनैतिक है।

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