PUNJAB: अमृतसर में ठाकुरद्वार मंदिर पर ग्रेनेड हमले के आरोपियों में से एक पुलिस एनकाउंटर में ढेर, दूसरा फरार

पंजाब के अमृतसर में सोमवार को ठाकुरद्वार मंदिर पर हुए ग्रेनेड हमले के आरोपियों में से एक को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया, जबकि दूसरा आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। यह एनकाउंटर अमृतसर के राजासांसी इलाके में हुआ, जिसमें पुलिस ने अपनी कार्रवाई करते हुए एक हमलावर को मार गिराया और दूसरे को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी रखा।
ठाकुरद्वार मंदिर पर हुआ ग्रेनेड हमला: दहशत का माहौल
15 मार्च 2025 को अमृतसर के ठाकुरद्वार मंदिर पर अज्ञात बदमाशों ने ग्रेनेड से हमला किया था, जिसके बाद इलाके में भारी दहशत फैल गई थी। हालांकि इस हमले में किसी की जान नहीं गई, लेकिन मंदिर के आसपास के इलाके में डर और चिंता का माहौल बन गया था। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां घटना के बाद से आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं।
हमले के बाद पंजाब के पुलिस मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने बताया था कि इस हमले के पीछे दो संदिग्धों की पहचान की गई है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया था कि इस हमले में कोई भी घायल या हताहत नहीं हुआ था। उन्होंने कहा था कि स्थिति अब नियंत्रण में है और पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
पुलिस का एक्शन: गुरसिदक ढेर, विशाल फरार
सोमवार को अमृतसर पुलिस ने गुरसिदक और विशाल नामक दो आरोपियों को पकड़ने के लिए एक ऑपरेशन चलाया, जो 15 मार्च के ग्रेनेड हमले में शामिल थे। यह एनकाउंटर राजासांसी इलाके में हुआ। पुलिस ने इन दोनों बदमाशों का पीछा करते हुए उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोनों आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह घायल हो गए, जबकि एक गोली इंस्पेक्टर अमोलक सिंह की पगड़ी पर भी लगी।
पुलिस के जवाबी फायरिंग में एक आरोपी गुरसिदक घायल हो गया। उसे गंभीर हालत में सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वहीं, दूसरा आरोपी विशाल मौके से फरार होने में सफल हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए अब भी तलाश कर रही है।
एसएचओ छेहरटा की कोशिश और पुलिस की प्रतिक्रिया
एनकाउंटर की शुरुआत से पहले एसएचओ छेहरटा ने मोटरसाइकिल पर सवार बदमाशों को रोकने की कोशिश की थी। जैसे ही पुलिस ने मोटरसाइकिल को रुकने का इशारा किया, आरोपियों ने बाइक छोड़ दी और पुलिस पार्टी पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। इस हमले में कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह के बाएं हाथ पर गोली लगी, जबकि एक गोली इंस्पेक्टर अमोलक सिंह की पगड़ी पर भी लगी।
इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने आत्मरक्षा में अपनी पिस्तौल से जवाबी गोलीबारी की, जिससे आरोपी गुरसिदक घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
पुलिस की कार्रवाई: खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन
पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने इस एनकाउंटर के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि 15 मार्च को ठाकुरद्वार मंदिर पर हमले में शामिल आरोपी राजासांसी इलाके में छिपे हुए हैं। पुलिस ने तुरंत ऑपरेशन चलाया और आरोपियों को घेरने की कोशिश की। जब हम उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह घायल हो गए, जबकि हमलावरों में से एक को गोली लगी और वह बाद में अस्पताल में मर गया। दूसरा आरोपी फरार हो गया, जिसे पकड़ने के लिए हम लगातार अभियान चला रहे हैं।”
गौरव यादव ने यह भी बताया कि पुलिस ने इस मामले में एक नई प्राथमिकी दर्ज की है और एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में जांच आगे बढ़ रही है।
हमले के बाद का माहौल: सुरक्षा की बढ़ी हुई सतर्कता
15 मार्च को हुए ग्रेनेड हमले के बाद से अमृतसर में सुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। घटना के बाद से पुलिस ने पूरी तरह से एहतियात बरतते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। साथ ही, पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों, खासकर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा जांच और गश्त बढ़ा दी है।
आलम यह है कि इलाके में पहले से ही सुरक्षाकर्मी तैनात थे, फिर भी इस तरह के हमले ने पुलिस के लिए चुनौती पैदा की है। स्थानीय लोग इस घटना से सदमे में हैं और अब वे यह चाहते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां और सख्ती से काम करें, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
अमृतसर के लोगों के बीच बढ़ी हुई चिंता
ठाकुरद्वार मंदिर पर हुआ ग्रेनेड हमला न केवल धार्मिक स्थल पर, बल्कि अमृतसर शहर के लोगों के बीच भी एक बड़ी चिंता का कारण बना है। धार्मिक स्थलों पर ऐसे हमले सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि पुलिस ने इस हमले में किसी को भी गंभीर रूप से घायल नहीं होने दिया, फिर भी स्थानीय लोग डर के साये में जी रहे हैं।
अमृतसर के निवासी अब यह चाहते हैं कि पुलिस धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर और भी कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों से बचा जा सके। यह घटना न केवल एक अपराध की चेष्टा थी, बल्कि यह धार्मिक और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की भी कोशिश हो सकती थी।