PUNJAB पुलिस द्वारा ईसाई धर्मगुरु बजिंदर सिंह के खिलाफ यौन शोषण मामले की जांच

पंजाब पुलिस ने शुक्रवार (07 मार्च) को कहा कि ईसाई धर्मगुरु और चर्च के पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ एक गंभीर यौन शोषण मामले की जांच चल रही है। 28 फरवरी को जालंधर की एक 22 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि बजिंदर सिंह ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से उत्पीड़ित किया। महिला की शिकायत पर बजिंदर सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, पीछा करने और धमकी देने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आरोपों की गंभीरता और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच को प्राथमिकता दी है, और कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा ने कहा कि जांच जारी है, हालांकि उन्होंने आगे की जानकारी देने से इंकार कर दिया। इसके साथ ही, पुलिस ने बताया कि बजिंदर सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354-A (यौन उत्पीड़न), 354-D (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बजिंदर सिंह के यूट्यूब चैनल पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी गई कि पादरी का 5-6 मार्च को नेपाल में दुख निवारण सत्संग का कार्यक्रम था। लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद, पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता महिला का आरोप
महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने अक्टूबर 2017 में अपने माता-पिता के साथ पहली बार बजिंदर सिंह के चर्च में जाना शुरू किया था। इसके बाद, पादरी ने उसका मोबाइल नंबर लिया और उसे टेक्स्ट संदेश भेजने शुरू कर दिए। महिला ने बताया कि वह बजिंदर सिंह से डरती थी, इसलिए उसने इस बारे में अपने माता-पिता को नहीं बताया।
महिला ने आरोप लगाया कि 2022 से, पादरी ने उसे रविवार को चर्च के एक केबिन में अकेले बुलाकर उसे गले लगाया और अनुचित तरीके से छुआ। उसने यह भी कहा कि पादरी ने उसे और उसके परिवार को धमकी दी थी कि अगर उसने उसके खिलाफ शिकायत की, तो वह उन्हें जान से मार डालेगा।
पुलिस की जांच और SIT का गठन
इस मामले में पुलिस ने जांच को और अधिक गंभीरता से लिया है और फगवाड़ा एसपी रूपिंदर कौर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया है। पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि मामले की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाए, ताकि न्याय दिलाया जा सके।
पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और महिला की सुरक्षा को लेकर पुलिस को निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने इस मामले में पंजाब पुलिस से त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को रोकने के लिए पुलिस को तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए।
बजिंदर सिंह का बयान
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बजिंदर सिंह ने सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। आजकल किसी के खिलाफ फर्जी चैट आसानी से बनाई जा सकती हैं। आरोप लगाने वाली महिला को मेरे खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करना चाहिए। चर्च में हर कोई जानता है कि वह (शिकायतकर्ता) दौरे से पीड़ित थी और उसे बुरी आत्माओं से मुक्ति की जरूरत थी। लोग हमारे चर्च में बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के लिए आते हैं और हमारा काम उन्हें प्रार्थना द्वारा मदद करना है। वह महिला हमारे लिए किसी बेटी की तरह है।”
बजिंदर सिंह के इस बयान ने मामला और भी विवादित बना दिया है, क्योंकि अब आरोप और जवाब दोनों सामने हैं। जबकि एक तरफ पुलिस मामले की जांच कर रही है, दूसरी तरफ आरोपी ने इसे एक झूठा आरोप बताया है।
कानूनी और सामाजिक पहलू
यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और कानूनी मुद्दे को भी उठाता है। जहां एक ओर धर्मगुरु के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप गंभीर हैं, वहीं इस प्रकार के मामलों में न्याय की प्रक्रिया को लेकर समाज और कानून के बीच एक संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा त्वरित कार्रवाई की मांग, और पुलिस द्वारा SIT का गठन इस मामले को अधिक संवेदनशील और गंभीर बना देता है। यह दिखाता है कि इस तरह के आरोपों को लेकर कानून और समाज अब ज्यादा जागरूक हो गए हैं और कोई भी आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।