PUNJAB: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पंजाब-चंडीगढ़ दौरा, केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा पहुंचीं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंची। इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा का दौरा किया, जहां उनका स्वागत किया गया। इस यात्रा के दौरान वह विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी, जिनमें चंडीगढ़ में इंडियन स्कूल के कार्यक्रम में भी उनकी भागीदारी होगी। राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा राज्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल राज्य की समृद्ध संस्कृति और शिक्षा क्षेत्र को मान्यता प्रदान करेगा, बल्कि यह उच्च शिक्षा, सामाजिक कल्याण और विकास के मामलों में भी महत्वपूर्ण संदेश देगा।
राष्ट्रपति का चंडीगढ़ आगमन, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचकर अपने तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत की। चंडीगढ़ टेक्निकल एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, चंडीगढ़ के प्रशासक, हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद थे। उनके स्वागत के दौरान सभी गणमान्य व्यक्तियों ने राष्ट्रपति को शाल उढ़ाकर सम्मानित किया।
इसके बाद, राजभवन में राष्ट्रपति के सम्मान में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जहां उन्होंने चंडीगढ़ और पंजाब के नेताओं से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने अपने स्वागत के दौरान राज्य के लोगों के साथ साझा किए गए अपने विचारों में शिक्षा, विकास, और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति का केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा दौरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा मंगलवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा तक पहुंचा, जहां उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षिक माहौल और विकास कार्यों का अवलोकन किया। केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और राष्ट्रपति मुर्मू ने यहाँ के विद्यार्थियों और शिक्षकों से मुलाकात की। यह विश्वविद्यालय शिक्षा के विकास और गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार काम कर रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने विश्वविद्यालय के छात्रों से बातचीत के दौरान उनकी मेहनत और प्रेरणा को सराहा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा छात्रों को भविष्य की ओर मार्गदर्शन करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और यह विश्वविद्यालय इस दिशा में अच्छी प्रगति कर रहा है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं और उन्हें सामाजिक कार्यों और मानवता के लिए काम करने की प्रेरणा दी।
राष्ट्रपति मुर्मू का इंडियन स्कूल कार्यक्रम में भाग लेना
मंगलवार शाम को राष्ट्रपति मुर्मू मोहाली स्थित इंडियन स्कूल के कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति का भाषण विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के लिए प्रेरणादायक होगा। राष्ट्रपति का यह कार्यक्रम शिक्षा के महत्व को लेकर एक संदेश देने का अवसर है। भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार, छात्र कल्याण, और विकास के मुद्दे पर उनके विचार विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन होंगे।
12 मार्च को पंजाब यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 12 मार्च को पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के 72वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस अवसर पर वह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करेंगी। यह दीक्षांत समारोह पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होगा, और राष्ट्रपति मुर्मू का उपस्थिति समारोह के महत्व को और भी बढ़ा देगी।
राष्ट्रपति के इस सम्मान समारोह में शामिल होने से विद्यार्थियों को उनके कठिन परिश्रम और समर्पण के लिए मान्यता मिलेगी। राष्ट्रपति मुर्मू ने दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों को उनके भविष्य के लिए प्रेरित किया और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास दिलाया। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ती है, बल्कि यह शिक्षा के प्रति छात्रों के उत्साह और समर्पण को भी दर्शाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने दौरे के दौरान कई अवसरों पर शिक्षा, समृद्धि और विकास की बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है, जो किसी भी समाज और देश को प्रगति की दिशा में मार्गदर्शन करता है। उनका यह संदेश विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए है, जो आने वाले समय में अपने देश और समाज की सेवा में योगदान देंगे।
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि भारतीय समाज में शिक्षा को एक पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, और यह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। उनके अनुसार, शिक्षा समाज में सामाजिक समरसता और एकता को बढ़ावा देने में भी मदद करती है, और यह राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।