UP : बसपा प्रमुख मायावती का एक्शन, भतीजे को पार्टी से बाहर निकाला

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह निर्णय बसपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद लिया गया और अब मायावती ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर भी सार्वजनिक कर दिया। यह कदम मायावती द्वारा अपने परिवार और पार्टी के भविष्य को लेकर उठाया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिसे लेकर अब राजनीति में कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आकाश आनंद को पार्टी से बाहर निकालने का कारण
2 मार्च 2025 को लखनऊ में हुई बसपा की राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकालने का फैसला लिया। मायावती ने इस फैसले को पार्टी के हित में बताया और कहा कि आकाश आनंद का पार्टी से निष्कासन उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव के कारण हुआ। पार्टी की प्रमुख ने कहा कि आकाश आनंद ने पार्टी के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर के पद से मुक्त होते हुए अपने ससुर के प्रभाव में रहते हुए अपने कार्यों को किया, जो पार्टी के मूल सिद्धांतों और मिशन से मेल नहीं खाते थे।
मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बीएसपी की आल-इंडिया बैठक में कल आकाश आनंद को पार्टी हित से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, जिसका उसे पश्चाताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन आकाश की प्रतिक्रिया ने साबित कर दिया कि वह पछतावे की जगह अपने ससुर के प्रभाव में रहते हुए पार्टी के मिशन से भटक गए हैं।” इस बयान में मायावती ने आकाश आनंद को स्वार्थी, अहंकारी और गैर-मिशनरी बताया और कहा कि उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का यह फैसला पूरी तरह से पार्टी की विचारधारा और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान आंदोलन के हित में लिया गया है।
मायावती का बयान: अनुशासन और विचारधारा पर जोर
मायावती ने आकाश आनंद के निष्कासन के बाद अपनी पार्टी की अनुशासन और विचारधारा की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने लिखा, “आकाश आनंद को उनके ससुर की तरह, पार्टी और आंदोलन के हित में निष्कासित किया जाता है। यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन की परंपरा और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित आत्म-सम्मान और स्वाभिमान आंदोलन के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।”
इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के अन्य सदस्यों को भी चेतावनी दी कि वे पार्टी के सिद्धांतों और अनुशासन से भटकने से बचें और भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने की कोशिश करें।
आकाश आनंद की प्रतिक्रिया
पार्टी से सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बाद, आकाश आनंद ने भी ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मायावती के नेतृत्व को सराहा और कहा कि वह हमेशा उनके आदेश का सम्मान करते हैं। आकाश ने लिखा, “मैं आदरणीय बहन मायावती का कैडर हूं, और उनके नेतृत्व में मैंने त्याग, निष्ठा और समर्पण के अमूल्य पाठ सीखे हैं। इन सबक को जीवन का उद्देश्य मानते हुए, मैं हमेशा उनके फैसलों का सम्मान करता हूं।”
आकाश ने अपने बयान में कहा कि मायावती द्वारा उन्हें पार्टी से मुक्त करना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भावनात्मक है, लेकिन यह उनके लिए एक नई चुनौती भी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस फैसले के साथ खड़े हैं और इसे एक कठिन परीक्षा मानते हैं, जो उनकी राजनीतिक यात्रा के लिए अहम होगी।
मायावती के फैसले के राजनीतिक और परिवारिक संदर्भ
मायावती का यह कदम पार्टी और परिवार के बीच में आने वाले तनाव को भी उजागर करता है। बसपा में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि मायावती के परिवार से जुड़े लोग पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं, और यह पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई का कारण बन सकता है। इस संदर्भ में आकाश आनंद का पार्टी से निष्कासन एक प्रतीकात्मक कदम है, जो यह दर्शाता है कि मायावती किसी भी स्थिति में पार्टी के अनुशासन से समझौता नहीं करेंगी।
मायावती के फैसले ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहतीं। हालांकि, इस कदम के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या इस निष्कासन से पार्टी की आंतरिक राजनीति में और अधिक तनाव बढ़ेगा, खासकर जब आगामी चुनावों में पार्टी को अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है।
बसपा की आगामी रणनीति
मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित करने का फैसला उस समय लिया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की चर्चा जोरों पर है। इस फैसले से पार्टी के भीतर एक साफ-सुथरी छवि बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाए। मायावती के इस कदम के बाद पार्टी के अंदर अनुशासन और विचारधारा को लेकर कड़े संकेत दिए गए हैं, जो चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
हालांकि, आकाश आनंद के निष्कासन के बाद पार्टी में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता। आकाश के समर्थन में पार्टी के कुछ सदस्य या समर्थक आ सकते हैं, जो इस फैसले को अस्वीकार कर सकते हैं। ऐसे में मायावती को अपनी पार्टी की एकजुटता बनाए रखने के लिए और भी कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।