महाकुंभ में ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने पर किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई

महाकुंभ के दौरान बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के फैसले पर किन्नर अखाड़े में उठे विवाद के बाद अब इस फैसले को लेकर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। खबरों के मुताबिक, किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही किन्नर अखाड़े के ऋषि अजय दास और कंप्यूटर बाबा द्वारा आज एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटाने का ऐलान किया जा सकता है।
किन्नर अखाड़े के विवाद का केंद्र बनी ममता कुलकर्णी
महाकुंभ के दौरान ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर के पद पर अभिषेक किया जाना शुरू से ही विवादों में घिरा रहा है। ममता कुलकर्णी, जो कि एक समय बॉलीवुड की चर्चित एक्ट्रेस रही हैं, को धार्मिक समुदायों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा था। कई संत और किन्नर अखाड़े के सदस्य ममता को महामंडलेश्वर बनाने के फैसले का विरोध कर रहे थे, जबकि अन्य ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया था।
इस विवाद के बाद अब किन्नर अखाड़े के प्रमुख नेता और आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर कार्रवाई की संभावना व्यक्त की जा रही है। उनका यह कदम महाकुंभ में संत समाज और किन्नर समुदाय के कुछ वर्गों के लिए विवाद का कारण बन गया है। किन्नर अखाड़े के भीतर इस फैसले के खिलाफ आक्रोश का माहौल बना हुआ है, और अब तक कई नेताओं ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई है।
ममता कुलकर्णी का बयान: आंसू दुख के नहीं, खुशी के थे
ममता कुलकर्णी ने अपने अभिषेक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके आंसू दुख के नहीं, बल्कि खुशी के थे। ममता ने स्पष्ट किया कि वह संन्यास लेने के लिए नहीं आईं, बल्कि उन्होंने 23 सालों तक कठोर तपस्या की है। ममता ने कहा, “जो लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि मैंने जीवन से हार कर संन्यास नहीं लिया है। मैंने 23 साल का कठोर तप किया है। लोग सोचते हैं कि मैं दुख के आंसू बहा रही थी, लेकिन यह उनके लिए भ्रम है। जब अभिषेक हो रहा था, तब मेरे आंसू खुशी के थे, क्योंकि मुझे भगवान का आशीर्वाद मिला था। यह एक महत्वपूर्ण दिन था और मुझे महामंडलेश्वर का पद मिलने का आशीर्वाद मिला।”
ममता के इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि वह अपने कदम को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप में देख रही हैं, जबकि उनके आलोचक इसे एक विवादास्पद राजनीतिक और सामाजिक कदम मान रहे हैं। ममता ने कहा कि यह उनकी आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस पद के लिए उन्होंने अपनी मेहनत और तपस्या से उसे हासिल किया है।
किन्नर अखाड़े के भीतर बढ़ता असंतोष
किन्नर अखाड़े के भीतर ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर असंतोष का माहौल बन चुका है। किन्नर समुदाय के कई प्रमुख नेताओं ने इस निर्णय को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ और समाज के लिए सही नहीं माना है। इन नेताओं का कहना है कि इस फैसले से किन्नर समुदाय की प्रतिष्ठा और सम्मान पर असर पड़ेगा।
ऋषि अजय दास और कंप्यूटर बाबा ने पहले ही इस फैसले पर आपत्ति जताई थी और अब उनके नेतृत्व में किन्नर अखाड़े के कुछ प्रमुख सदस्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आज आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है, जिसमें त्रिपाठी को उनके पद से हटा कर किसी नए नेता को नियुक्त करने का ऐलान किया जा सकता है।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर कार्रवाई की संभावना
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, जो कि किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर हैं, पर इस फैसले के बाद से कई आरोप लगाए जा रहे हैं। किन्नर समाज के कुछ वर्गों का कहना है कि त्रिपाठी ने इस फैसले को केवल एक मीडिया शो बनाने के लिए लिया, न कि समुदाय की आस्था और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए। कुछ अन्य नेता भी इस फैसले को किन्नर समाज की आस्था को कमजोर करने वाला मानते हैं।