नागपुर हिंसा में NIA की एंट्री, बांग्लादेशी कनेक्शन का हुआ खुलासा

नागपुर में हुई हिंसा की जांच में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एंट्री हो गई है। मामले में उभरते नए तथ्यों के बाद एनआईए ने घटना स्थल का दौरा किया और शुरुआती जानकारी जुटाई। खासकर, बांग्लादेशी कनेक्शन के बाद एजेंसी ने इस मामले में अपनी जांच को और गहराई से करने का निर्णय लिया है। NIA के अधिकारियों ने छत्रपति संभाजीनगर में औरंगजेब की कब्र का दौरा किया और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। हिंसा के फैलने के कारणों और इसे बढ़ावा देने वाले तत्वों के बारे में जानकारी एकत्र की गई।
NIA की टीम का औरंगजेब की कब्र का दौरा
एनआईए के अधिकारियों ने सोमवार, 17 मार्च को नागपुर में हुई हिंसा के बाद अब इस मामले की जांच को एक नया मोड़ दिया है। एनआईए की एक टीम ने छत्रपति संभाजीनगर स्थित औरंगजेब की कब्र का दौरा किया और यहां के सीनियर पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। जांच के दौरान अधिकारियों ने इलाके का मुआयना किया और पाया कि हिंसा के पीछे कुछ गंभीर कारण हैं, जिनमें बाहरी तत्वों की भूमिका भी हो सकती है।
NIA सूत्रों के अनुसार, यह हिंसा ना केवल स्थानीय विवाद का परिणाम थी, बल्कि इसमें बांग्लादेशी कनेक्शन भी सामने आया है, जिसके कारण मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इस जांच के बाद, एनआईए जल्द ही इस मामले में केस दर्ज कर सकती है।
नागपुर हिंसा में बांग्लादेशी कनेक्शन
बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियां इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पूरी तहकीकात में जुट गई हैं। नागपुर हिंसा में यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई बाहरी तत्वों का इसमें हाथ हो सकता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ संदिग्ध व्यक्ति पकड़े गए थे, जिनके बांग्लादेश से कनेक्शन होने के संकेत मिले थे।
साथ ही, यह भी सामने आया कि हिंसा में शामिल कुछ लोगों के पास विदेशी फंडिंग भी हो सकती है। हालांकि, एनआईए इस मामले की पूरी जांच के बाद ही इस कनेक्शन की सच्चाई का खुलासा करने का दावा कर रही है।
नागपुर हिंसा: कैसे हुई थी शुरुआत?
इस हिंसा की शुरुआत तब हुई थी जब औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा नागपुर में एक विरोध प्रदर्शन किया गया था। सोमवार, 17 मार्च को वीएचपी ने औरंगजेब का पुतला जलाया, जिसके बाद घटनाक्रम तेजी से बिगड़ा। पुतला जलाने की घटना का वीडियो वायरल होते ही महाल इलाके में हिंसा भड़क गई।
हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने पथराव किया, घरों पर हमले किए और सड़कों पर खड़े वाहनों में आग लगा दी। इसके बाद, पुलिस को भी उपद्रवियों से निपटने के लिए आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। हिंसा में पुलिस अधिकारी, डीसीपी निकेतन, भी घायल हो गए थे। डीसीपी पर तो कुल्हाड़ी से हमला किया गया था, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी।
पुलिस ने की 90 से अधिक गिरफ्तारियां
पुलिस ने इस हिंसा को नियंत्रण में करने के लिए तुरंत कार्यवाही की और 10 एफआईआर दर्ज की। इसमें 90 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कई ऐसे लोग थे, जिनका हिंसा से सीधे तौर पर कनेक्शन था। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी दावा किया कि इस हिंसा में शामिल कुछ लोगों के बारे में जानकारी मिलने के बाद और भी गिरफ्तारी हो सकती है।
पुलिस ने यह भी बताया कि हिंसा को बढ़ावा देने के पीछे मुख्य आरोपी फहीम शमीम खान था, जिसे 19 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। फहीम खान पर आरोप था कि उसने 500 से ज्यादा लोगों को एकत्रित किया था और हिंसा को बढ़ावा दिया था।
फहीम खान का गिरफ्तार होना और आरोप
पुलिस ने फहीम शमीम खान को 19 मार्च को गिरफ्तार किया और उसे 21 मार्च तक की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। फहीम खान पर आरोप था कि उसने हिंसा में प्रमुख भूमिका निभाई थी और देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फहीम खान ने कथित तौर पर कई ऐसे उग्र तत्वों को एकत्र किया, जिन्होंने हिंसा को अंजाम दिया।
फहीम के साथ ही छह अन्य आरोपियों के खिलाफ भी देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। इन आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने हिंसा को फैलाने और सामूहिक रूप से हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी।
पुलिस कार्रवाई और कर्फ्यू
हिंसा की स्थिति को काबू करने के लिए पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की। महाल इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इलाके में शांति स्थापित करने के लिए पुलिस ने कई कदम उठाए। इसके अलावा, प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से नाइट कर्फ्यू भी लगाया, ताकि स्थिति और भी खराब न हो।
पुलिस ने हिंसा के दौरान आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई सामग्रियों की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही, जांच एजेंसियां उन लोगों को भी ट्रैक कर रही हैं, जिन्होंने हिंसा के लिए लोगों को उकसाया या उनके साथ मिलकर इसे अंजाम दिया।