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महाकुंभ में दूसरा शाही स्नान, स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल ने स्वामी कैलाशानंद गिरी से लिया आध्यात्मिक आशीर्वाद

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में आज दूसरा शाही स्नान हुआ, जिसमें करीब 60 लाख श्रद्धालुओं ने संगम की पवित्र धारा में आस्था की डुबकी लगाई। सनातन धर्म के इस महान धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। खास बात यह रही कि इस बार महाकुंभ में दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी ऐपल के को-फाउंडर दिवंगत स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल भी अपने आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरी के साथ कल्पवास के लिए पहुंची हैं।

स्वामी कैलाशानंद गिरी: आध्यात्मिक गुरु की पहचान

स्वामी कैलाशानंद गिरी, जो वर्तमान में निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर हैं, का नाम इस महाकुंभ में खास चर्चा में है। उनके मार्गदर्शन में अब तक कई बड़ी हस्तियों ने आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति की है। स्वामी कैलाशानंद गिरी के बारे में कहा जाता है कि वे संतों के बीच एक ऊंची स्थिति रखते हैं और उन्हें शंकराचार्य के बाद सबसे बड़े संतों में गिना जाता है।

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने 2021 में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वे अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर थे। संतों के इस उच्च पद पर आसीन होने के बाद स्वामी कैलाशानंद ने न केवल संत समाज को मार्गदर्शन दिया, बल्कि देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालुओं को भी ध्यान और साधना की दिशा दिखाई।

स्वामी कैलाशानंद गिरी का जीवन: एक तपस्वी साधक

स्वामी कैलाशानंद गिरी का जन्म 1976 में बिहार के जमुई जिले में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से थे, लेकिन बचपन से ही उनका झुकाव धार्मिकता की ओर था। अपने परिवार और दुनियावी जीवन को त्यागकर उन्होंने सन्यास लेने का निर्णय लिया और तपस्या के लिए हिमालय की कठिन साधना की ओर अग्रसर हुए। वे भगवान की भक्ति में इतने लीन हो गए कि उन्होंने कभी भी पारिवारिक जीवन की ओर नहीं देखा।

महामंडलेश्वर बनने के लिए व्यक्ति को कई सालों की कठिन तपस्या, साधना और भक्ति से गुजरना पड़ता है। स्वामी कैलाशानंद ने अपने जीवन में इन सभी कठिनाइयों का सामना किया और अंततः संत समाज में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।

स्वामी कैलाशानंद गिरी से आध्यात्मिक आशीर्वाद लेने वाली हस्तियां

स्वामी कैलाशानंद गिरी का आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से कई नामचीन हस्तियां उनसे जुड़ी हैं। राजनीति से लेकर फिल्म और संगीत उद्योग तक, कई प्रमुख लोग स्वामी कैलाशानंद के भक्त हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सहित कई राजनेता उनके पास आकर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। इसके अलावा बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत, रैपर हनी सिंह, क्रिकेटर ऋषभ पंत और कई अन्य हस्तियों ने स्वामी कैलाशानंद गिरी से मार्गदर्शन लिया है।

स्वामी कैलाशानंद गिरी का प्रभाव देशभर में फैला हुआ है और उनकी उपस्थिति महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में विशेष महत्व रखती है।

लॉरेन पॉवेल का आध्यात्मिक सफर: स्वामी कैलाशानंद गिरी के साथ कल्पवास

महाकुंभ में, स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल ने भी स्वामी कैलाशानंद गिरी से आध्यात्मिक आशीर्वाद लिया। लॉरेन, जो एक व्यवसायी और समाजसेवी हैं, लंबे समय से भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं से जुड़ी रही हैं। उन्होंने महाकुंभ के इस पवित्र अवसर पर स्वामी कैलाशानंद गिरी के मार्गदर्शन में कल्पवास करने का निर्णय लिया।

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने लॉरेन को अपना गोत्र दिया और उन्हें एक नया नाम “कमला” दिया। यह नाम उन्हें स्वामी कैलाशानंद के द्वारा उनकी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया। इस नाम से लॉरेन ने अपनी आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की और भारतीय संस्कृति को और गहराई से समझने का प्रयास किया।

लॉरेन पॉवेल का यह कदम उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जहां वे अपने जीवन को अधिक सादगी और आध्यात्मिकता की ओर मोड़ने की कोशिश कर रही हैं। महाकुंभ में उनका आना और स्वामी कैलाशानंद गिरी से आशीर्वाद लेना एक महत्वपूर्ण घटना है, जो भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।

महाकुंभ का महत्व: आस्था और श्रद्धा का महापर्व

महाकुंभ, जो हर 12 साल में एक बार होता है, एक ऐसा धार्मिक आयोजन है, जो पूरी दुनिया के हिंदू समुदाय को एकजुट करता है। यह स्नान पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करके अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

महाकुंभ के दौरान विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, श्रद्धालु और विश्वभर से आने वाली हस्तियां संगम के तट पर पहुंचती हैं। इस पर्व का आयोजन भारतीय संस्कृति की समृद्धता और धार्मिक विविधता को प्रकट करता है।

आज के दूसरे शाही स्नान में 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम की पवित्र जलधारा में स्नान किया और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की कामना की। इस विशेष दिन पर लाखों लोग इस महान धार्मिक अवसर का हिस्सा बने और महाकुंभ के आध्यात्मिक माहौल में डुबकी लगाई।

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