श्रेयस अय्यर ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में अपनी भूमिका पर खोला राज, “कोई भी सिचुएशन में भेजो, करके आऊंगा”

भारत ने हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब जीतकर एक और ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। इस जीत का हिस्सा बने कई खिलाड़ियों की सराहना हुई, लेकिन एक खिलाड़ी ऐसा भी था जिसका प्रदर्शन शानदार होने के बावजूद उतनी सराहना नहीं मिल पाई, जितनी उसे मिलनी चाहिए थी। यहां बात हो रही है श्रेयस अय्यर की, जिन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम के लिए शानदार बल्लेबाजी करते हुए 243 रन बनाए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बने।
श्रेयस अय्यर का योगदान इस टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण था, और उनका प्रदर्शन भारतीय टीम की सफलता में अहम भूमिका निभा रहा था। हालांकि, उनकी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें उतनी सराहना नहीं मिली, जितनी उन्हें मिलनी चाहिए थी। अब श्रेयस ने अपने शानदार प्रदर्शन पर चुप्पी तोड़ी और अपनी मानसिकता और बल्लेबाजी शैली के बारे में खुलकर बात की।
श्रेयस अय्यर की ‘नंबर-4’ पोजीशन पर विचार
श्रेयस अय्यर ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा हर स्थिति में अपनी भूमिका निभाने की पूरी कोशिश की है। भारतीय क्रिकेट टीम में चौथे नंबर की पोजीशन लंबे समय से एक चुनौती रही है, और यह पोजीशन हमेशा से टीम के लिए महत्वपूर्ण रही है। श्रेयस अय्यर ने इस पोजीशन पर बल्लेबाजी करते हुए अपनी भूमिका को बखूबी निभाया है। उन्होंने कहा, “चौथे नंबर की पोजीशन पर बल्लेबाजी करना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि इस क्रम पर बल्लेबाज को कभी उच्चतम क्रम की नाकामी को छुपाने का काम करना पड़ता है, और कभी निचले क्रम के बल्लेबाजों पर दबाव को भी कम करना होता है।”
श्रेयस ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर यह भी कहा कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहते हैं और उनका आत्मविश्वास उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहने की शक्ति देता है। उनका कहना था कि “मैं पूरे जोश के साथ मैदान में उतरता हूं और मेरे दिमाग में और कुछ भी नहीं होता। मुझे पूरा भरोसा होता है कि जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है, मैं उसे पूरा करूंगा।”
“कोई भी सिचुएशन में भेजो, करके आऊंगा”
श्रेयस अय्यर का मानना है कि रिजेक्शन और असफलता से ही आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती मिलती है। उन्होंने बताया कि उनकी मानसिकता हमेशा यही रही है कि चाहे जिस भी सिचुएशन में भेजा जाए, वह अपना पूरा योगदान देंगे और टीम के लिए मैच जीतने की कोशिश करेंगे। “रिजेक्शन और असफलता झेलने के बाद मेरे अंदर आत्मविश्वास जागता है। असफलता आपको बहुत कुछ सिखाती है, और यही अनुभव मुझे और मजबूत बनाता है,” अय्यर ने कहा।
श्रेयस ने अपने मानसिक दृष्टिकोण को लेकर एक उदाहरण भी साझा किया, जिसमें वह बताते हैं कि उन्होंने कैसे पिछले कुछ वर्षों में अपनी कठिनाइयों को पार किया और अपनी बल्लेबाजी में निरंतर सुधार किया। उन्होंने यह भी कहा कि हर मैच में उन्हें अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का पूरा भरोसा होता है, और यही विश्वास उन्हें किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है।
टेस्ट करियर पर भी बोले श्रेयस अय्यर
श्रेयस अय्यर का टेस्ट करियर भी पिछले कुछ वर्षों में प्रभावशाली रहा है। उन्होंने आखिरी टेस्ट मैच फरवरी 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। अब जब टेस्ट टीम में अपनी वापसी को लेकर बात की गई, तो उन्होंने कहा, “मैंने डोमेस्टिक टूर्नामेंट्स में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है। मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोचता क्योंकि जितना अधिक सोचूंगा, उतना ही स्ट्रेस बढ़ेगा।”
श्रेयस ने यह भी कहा कि वह वर्तमान में जीने और अपने खेल का आनंद लेने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि अगर वह हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे, तो टेस्ट टीम में वापसी का रास्ता अपने आप खुल जाएगा। “मैं वर्तमान में जीकर मजे करता हूं और भविष्य को लेकर किसी भी तरह की चिंता नहीं करता,” अय्यर ने कहा।
श्रेयस अय्यर का कड़ी मेहनत का फल
श्रेयस अय्यर की चैंपियंस ट्रॉफी में शानदार बल्लेबाजी ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में एक विशेष स्थान दिलाया है। टूर्नामेंट में 243 रन बनाकर उन्होंने अपनी क्षमता को साबित किया और यह दिखा दिया कि वह भारतीय टीम के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। उनका शानदार प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वह भारतीय क्रिकेट में भविष्य में भी अपनी जगह बनाए रखेंगे।
अय्यर ने अपनी बल्लेबाजी को लेकर जो मानसिकता अपनाई है, वह उन्हें न केवल बड़े मैचों में बल्कि किसी भी परिस्थिति में सफल होने में मदद करती है। उनका आत्मविश्वास और हर हाल में टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करने का जज्बा उन्हें एक सशक्त खिलाड़ी बनाता है।