उत्तराखंड में हिमस्खलन की घटनाओं के कारण अलर्ट, आज से मौसम में सुधार

उत्तराखंड में लगातार हो रही बर्फबारी के कारण हिमस्खलन की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमस्खलन एक सामान्य प्राकृतिक घटना है, लेकिन जब यह अत्यधिक बर्फबारी और पहाड़ी इलाकों में होती है तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्यों की तैयारी तेज कर दी गई है।
हिमस्खलन का सामान्य प्रकृति: डॉ. अमित कुमार
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार का कहना है कि हिमस्खलन एक प्राकृतिक और सामान्य घटना है, जो खासकर बर्फबारी के दौरान होती है। उनका कहना है, “हिमस्खलन तब होता है जब ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की अधिकता होती है। इन इलाकों में बर्फ लगातार गिरती रहती है और कुछ विशेष ढलानों पर यह टिक नहीं पाती, जिससे वह गिर जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह एक सामान्य घटना है, लेकिन इन क्षेत्रों में जब बर्फबारी अत्यधिक होती है, तो यह जोखिम को बढ़ा देती है और हिमस्खलन के रूप में तबाही मचा सकती है।
डॉ. कुमार ने यह भी बताया कि ऐसे इलाके, जो हिमस्खलन के लिए संवेदनशील होते हैं, वहां पर बर्फ की परत बहुत भारी हो सकती है और जब यह बर्फ का ढांचा टूटता है, तो वह नीचे की ओर गिरता है, जिससे भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इस संदर्भ में हिमालय क्षेत्र और खासकर उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में हिमस्खलन की घटनाएं अधिक होती हैं, क्योंकि यहां ऊंचाई और बर्फबारी दोनों का मिश्रण होता है।
मौसम विभाग का अलर्ट और विशेष चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह ने भी इस संबंध में जानकारी दी और कहा, “अत्यधिक बर्फबारी होने के कारण हिमस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसके मद्देनजर ही हमनें आरेंज अलर्ट जारी किया है, ताकि सभी लोग सतर्क रहें और बचाव कार्यों के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।” उनका कहना था कि शनिवार से मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा, लेकिन फिलहाल स्थिति अभी भी जटिल है।
मौसम विभाग ने बर्फबारी के चलते उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में अलर्ट जारी किया है। विशेषकर उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में 2400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन की संभावना जताई गई है।
भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान का अलर्ट
इसके साथ ही, रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DEI) ने भी हिमस्खलन के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। संस्थान ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हिमस्खलन हो सकता है, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां 2400 मीटर से ऊपर की ऊंचाई है। इन क्षेत्रों में चमोली को अत्यधिक असुरक्षित स्थिति में बताया गया है, जबकि रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर और उत्तरकाशी को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी इस चेतावनी के बाद अलर्ट जारी किया है और सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा से बचें। जिन क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है, वहां एहतियाती कदम उठाए जाएं। प्रशासन ने पर्यटकों को भी इन इलाकों में जाने से मना किया है और राहत कार्यों को प्राथमिकता देने का आदेश दिया है।
हिमस्खलन के कारण होने वाली खतरे की स्थिति
हिमस्खलन एक खतरनाक घटना हो सकती है, खासकर तब जब यह भारी बर्फबारी के कारण होता है। इस प्रकार के घटनाएं न केवल लोगों के लिए खतरनाक होती हैं, बल्कि सड़क मार्गों की खराब स्थिति, बिजली की कटौती, और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी प्रभाव डालती हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़कों के बंद होने, पुलों के गिरने और अन्य दिक्कतों के कारण जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। ऐसे में राहत कार्यों में भी कठिनाइयां आती हैं, क्योंकि घेराबंदी और बर्फबारी के चलते बचाव दलों के लिए काम करना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमस्खलन की घटनाएं वायुमंडलीय स्थितियों और स्थानीय भूगोल पर निर्भर करती हैं। जब भारी बर्फबारी के दौरान एक साथ बहुत अधिक बर्फ गिरती है, तो यह बर्फ एक बार में टूटकर ढलान की दिशा में गिर जाती है, जिससे बड़ी तबाही हो सकती है। इस दौरान यह अत्यधिक जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है।
भविष्य में इससे निपटने के उपाय
राज्य सरकार और विशेषज्ञों ने भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं। सबसे पहले, पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के पहले से अधिक आकलन और चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे नागरिकों को समय से पहले सतर्क किया जा सकता है और राहत कार्यों को प्रभावी तरीके से चलाया जा सकता है।
दूसरा, भूस्खलन और हिमस्खलन के संभावित क्षेत्रों में बर्फ की स्थिरता को जांचने के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। इन उपकरणों की मदद से ऐसी घटनाओं को पहले से ही अनुमानित किया जा सकता है, जिससे समय रहते बचाव कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा, नागरिकों को भी हिमस्खलन से बचने के उपायों के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है।