चैंपियन और उमेश कुमार के बीच विवाद पर BJP अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान “कानून अपने हाथ में लेना गलत”

उत्तराखंड में पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के बीच हुए विवाद ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस विवाद पर अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान सामने आया है। उन्होंने इस मामले को लेकर स्पष्ट कहा है कि हरिद्वार में जो माहौल दो दिन से बन रहा है, वह दोनों नेताओं को शोभा नहीं देता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “कानून अपने हाथ में लेना गलत है” और किसी को भी ऐसी स्थितियों में कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में बात की है और कहा कि भाजपा पार्टी किसी भी नेता को इस तरह के कृत्य की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है और जो भी दोषी होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विवाद की जड़: सोशल मीडिया पर अपशब्दों का आदान-प्रदान
यह विवाद शनिवार को उस समय शुरू हुआ जब पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और विधायक उमेश कुमार के बीच सोशल मीडिया पर कुछ अपशब्दों का आदान-प्रदान हुआ। यह विवाद कुछ ही घंटों में बढ़ गया और दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच गहमागहमी का माहौल बन गया। शनिवार की रात को उमेश कुमार अपने समर्थकों के साथ चैंपियन के कैंप कार्यालय और लंढौरा महल के बाहर पहुंचे, जहां जमकर हंगामा हुआ।
उमेश कुमार ने चैंपियन को सोशल मीडिया के जरिए सामने आने की चुनौती दी और उनका मजाक उड़ाया। इस दौरान, हंगामे के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौच की घटनाएं दिखाई दीं।
रविवार को स्थिति और भी तनावपूर्ण हुई
रविवार को स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई जब चैंपियन और उनके समर्थक बड़ी संख्या में उमेश कुमार के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जमकर तोड़फोड़ और मारपीट हुई। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग भी की गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
चैंपियन के समर्थकों ने उमेश कुमार के कार्यालय पर हमला करते हुए उनके समर्थकों से भिड़ गए। यह घटना देखकर स्थानीय पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी बल तैनात करना पड़ा।
पुलिस की कार्रवाई और भाजपा अध्यक्ष का बयान
इस घटनाक्रम के बाद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। उन्होंने कहा, “पार्टी किसी को भी यह अनुमति नहीं देती कि वह कानून को अपने हाथ में ले और हिंसा का सहारा ले। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में बातचीत की गई है और पुलिस कार्रवाई कर रही है।”
महेंद्र भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से राज्य की छवि को नुकसान पहुंचता है और यह राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए भी खतरनाक हो सकती है।
पुलिस का रवैया और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच हुई हिंसा के मामले में मुकदमा दर्ज किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ दंगा फैलाने, जान से मारने की धमकी देने, और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप लगाए हैं।
रुड़की पुलिस का कहना है कि स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है और दोनों नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने दोनों नेताओं को तलब किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है, साथ ही उनके समर्थकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
राजनीति में तूल पकड़ता विवाद
इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में एक नई दिशा पकड़ ली है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान के बाद, अब विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है, आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार की तरफ से इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
विपक्ष का कहना है कि इस प्रकार की हिंसा और विवाद को सख्ती से निपटाना चाहिए, ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि इस प्रकार के कृत्यों को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों को कड़ी सजा दिलवाई जाएगी।
राजनीतिक क्षेत्र में असहमति की बढ़ती खाई
इस विवाद के बाद, राज्य के राजनीतिक हलकों में असहमति की खाई और बढ़ गई है। चैंपियन और उमेश कुमार दोनों ही भाजपा के खिलाफ विचार रखने वाले नेता हैं, और उनके बीच का यह विवाद राज्य में भाजपा के लिए एक चुनौती बन सकता है। हालांकि, भाजपा ने इस विवाद को सख्ती से निपटने की बात की है, लेकिन यह देखना बाकी है कि इस विवाद का राजनीतिक असर किस हद तक पड़ेगा।
उमेश कुमार के समर्थकों ने जहां चैंपियन के खिलाफ नाराजगी जताई है, वहीं चैंपियन के समर्थक भी अपनी आक्रामकता को लेकर तैयार हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।