CM धामी ने प्रयागराज में समान नागरिक संहिता के समर्थन में संतों का आशीर्वाद लिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को प्रयागराज में आयोजित आचार्य शिविर में समानता के साथ समरसता कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में संतों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया और उन्हें उत्तराखंड राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री धामी ने संतों के आशीर्वाद को बड़े सौभाग्य की बात बताते हुए कहा कि त्रिवेणी की पवित्र भूमि और महाकुंभ के शुभ अवसर पर उन्हें पूज्य संतों का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विकसित भारत’ की कल्पना में पूज्य संतों के आशीर्वाद को अत्यधिक महत्वपूर्ण बताया।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर मुख्यमंत्री धामी का संबोधन
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का लागू करना, भारत को एक समरस और समान समाज की दिशा में बढ़ने की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “यह हम सब के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य ने देश की आजादी के बाद सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू की है।”
उन्होंने कहा कि इस निर्णय को 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की जनता के सामने संकल्प के रूप में रखा गया था, और जनता ने इस संकल्प को पूरी तरह से समर्थन दिया। सरकार बनने के बाद, उन्होंने सबसे पहले मंत्रिमंडल की बैठक में इस विषय पर चर्चा की और एक कमेटी का गठन किया, जिसने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
समान नागरिक संहिता के महत्व पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में आगे कहा, “समान नागरिक संहिता लागू करना, हमारे राज्य और देश को एक समान और समरस बनाना है। यह उन मूल्यों के अनुरूप है, जिनके तहत संविधान निर्माताओं ने समान कानूनों का प्रावधान किया था।” उन्होंने उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारा राज्य गंगा, यमुना, चार धामों, आदि कैलाश, संतों का प्रदेश है, जहां हर घर में कोई न कोई व्यक्ति भारतीय सेना में सेवा दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने महाकुंभ को सनातन संस्कृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस पवित्र अवसर पर संतों का आशीर्वाद उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड की सनातन संस्कृति में हमेशा समरसता और समानता को महत्व दिया गया है। यह हमारी संस्कृति का मूल सिद्धांत है कि हम सबको समानता का अधिकार है।
यूसीसी का प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प से कनेक्शन
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी पूरा करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में, उत्तराखंड से यह गंगा पूरे देश में फैलने का कार्य करेगी और हर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हुई श्रद्धा वाकर हत्या की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद, ऐसी घटनाएं पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि अब हमारी बेटियों और समाज के अन्य सदस्यों के खिलाफ अपराध करने का कोई साहस नहीं करेगा।
संतों का समर्थन और उत्तराखंड के लिए गर्व की बात
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि उत्तराखंड जैसा दिव्य स्थान कोई नहीं है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सभी संतों के अत्यधिक प्रिय हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने जो कदम उठाया है, वह भारत को एक नई दिशा दे रहा है।
स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने यह भी कहा कि यूसीसी को लेकर जब कमेटी काम कर रही थी, तो साधु संतों से भी संवाद किया गया था। उन्होंने विश्वास जताया कि अन्य राज्य भी जल्द ही उत्तराखंड की राह पर चलेंगे और यूसीसी लागू करेंगे।
संतों का समर्पण और समर्थन
इस अवसर पर कई प्रसिद्ध संत भी मौजूद थे, जिनमें स्वामी चिदानंद मुनि, महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज, श्रीमहंत रविंद्रपुरी जी महाराज, महंत श्रीहरि गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर नारायण गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति, महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज और अन्य संतगण शामिल थे।
संतों ने मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह साहसिक निर्णय राष्ट्र के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा और यह भारतीय संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करेगा। संतों ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता के लागू होने से समाज में समरसता और एकता बढ़ेगी, और यह भारत की आंतरिक शक्ति को भी मजबूती प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संतों द्वारा पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस सम्मान को मुख्यमंत्री ने अपने लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हर नागरिक का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि उनका यह सम्मान उत्तराखंड की जनता के सामूहिक समर्पण और एकता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि यह कदम उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को और भी समृद्ध करेगा। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड न केवल भारत की धर्मनिरपेक्षता और समानता का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य समाज में समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ रहा है।