CM योगी तीन दिवसीय दौरे के बाद लखनऊ वापसी, मां की अनुपस्थिति में बहनों ने निभाई ये रश्म
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अपने तीन दिवसीय दौरे के बाद लखनऊ लौट गए। यह दौरा उनके पैतृक गांव पंचूर में आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने अपनी भतीजी की शादी में शिरकत की और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। हालांकि, इस बार उनकी विदाई कुछ खास रही, क्योंकि उनके पारंपरिक विदाई के समय की रश्म को निभाने वाली उनकी मां, सावित्री देवी, इस बार अपनी बीमारी के कारण अनुपस्थित रही। ऐसे में यह रश्म योगी की बहनों ने निभाई, जो उनके लिए एक भावुक क्षण था।
मां की अनुपस्थिति में बहनों ने निभाई परंपरा
योगी आदित्यनाथ के लिए यह परंपरा रही है कि उन्हें हर बार उनकी मां अपने हाथों से दही-शक्कर खिलाकर विदा करती थीं, जो एक संकेत था उनके घर से सम्मान और आशीर्वाद का। लेकिन इस बार, उनकी मां अत्यधिक बुजुर्ग हो चुकी हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते इस परंपरा को पूरा करने में असमर्थ थीं। सावित्री देवी को कुछ समय पहले एम्स में इलाज के लिए भर्ती किया गया था और उनकी आंखों में भी समस्याएं आ गई थीं, जिससे वह घर से बाहर भी नहीं निकल पा रही थीं। ऐसे में योगी की विदाई के समय उनकी बहनों ने यह रश्म निभाई और अपने भाई को दही-शक्कर खिलाकर विदा किया। यह दृश्य भावनाओं से भरा हुआ था और गांववासियों के लिए एक संवेदनशील पल बन गया।
योगी ने किए कई सार्वजनिक कार्य
योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य भी शामिल थे। 6 फरवरी को, वह अपनी भतीजी की शादी में भाग लेने के लिए पंचूर आए थे, जहां उन्होंने न केवल पारिवारिक समारोह का हिस्सा बने, बल्कि अन्य सरकारी कार्यक्रमों में भी भाग लिया। उन्होंने गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय, बिथ्याणी में 100 फीट ऊंचे तिरंगे का उद्घाटन किया, जो देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया। इसके अलावा, उन्होंने कृषि विभाग के कार्यक्रम में भी भाग लिया और तल्ला बनास के गढ़खाल स्थित मंदिर में गढ़वासनी देवी और वनवासी श्रीराम मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए।
योगी ने पंचूर क्षेत्र के चार स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में भी सहभागिता की, जहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से संवाद किया और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए योजनाओं पर चर्चा की।
विदाई के समय परिजनों और ग्रामीणों की उपस्थिति
रविवार को लगभग 10:30 बजे, योगी आदित्यनाथ ने परिजनों से विदाई ली। इस मौके पर उनका परिवार और गांववासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। परिजनों के बीच यह एक गहरी भावना का समय था, क्योंकि योगी आदित्यनाथ का परिवार और उनके गांववासी उन्हें हमेशा एक आदर्श के रूप में देखते हैं।
इस दौरान, योगी आदित्यनाथ ने अपने गांववासियों से संवाद किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। विदाई से पहले, योगी ने अपने गुरु अवैद्यनाथ की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और उनका आशीर्वाद लिया। यह एक पारंपरिक क्रिया थी, जिसे योगी ने अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार अदा किया।
विधायक रेनू बिष्ट के साथ केंद्रीय विद्यालय निर्माण की चर्चा
योगी की विदाई के दौरान, स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट भी मौजूद थीं। उन्होंने योगी से क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण की चर्चा की। यह विद्यालय यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में बनने जा रहा है, जिसके लिए भूमि तलाशी जा रही है। विधायक ने योगी से क्षेत्र के अन्य सरकारी स्कूलों के सुधारीकरण और शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए चर्चा की। इस प्रकार, इस दौरान शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी चर्चा हुई।
पलायन और अन्य मुद्दों पर भी हुई बातचीत
विदाई के समय योगी आदित्यनाथ और विधायक रेनू बिष्ट ने पलायन की समस्या पर भी बातचीत की। इस विषय में उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों और नेताओं से विचार विमर्श किया और भविष्य में पलायन को रोकने के लिए उपायों पर चर्चा की। योगी ने पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और बेहतर सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
योगी का अगला कदम: लखनऊ लौटने की प्रक्रिया
अपने दौरे के बाद, योगी आदित्यनाथ ने करीब 10:30 बजे परिजनों से विदाई लेकर बिथ्याणी महाविद्यालय परिसर में स्थित गुरु अवैद्यनाथ की मूर्ति पर आशीर्वाद लिया और फिर हेलिपैड से जौलीग्रांट एयरपोर्ट की ओर रुख किया। इस दौरान उन्होंने कोई भी सार्वजनिक कार्य में हिस्सा नहीं लिया और निजी समय अपने परिवार के साथ बिताया।
योगी की यह विदाई और उनके दौरे का समापन एक विशेष घटना बन गई, क्योंकि यह न केवल उनके परिवार के साथ जुड़ी एक भावनात्मक रिवाज का हिस्सा था, बल्कि यह उनके सामाजिक और राजनीतिक जुड़ावों को भी दर्शाता है।