Uttarakhand

DEHRADUN : श्री झंडे जी का आरोहण शुरू, आस्था और सद्भावना की लहर

दून क्षेत्र के ऐतिहासिक श्री झंडे जी मेले के आयोजन की शुरुआत हो चुकी है। बुधवार को श्री झंडे जी का आरोहण, आस्था और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में पूरे धूमधाम से सम्पन्न होगा। इस प्रक्रिया का शुभारंभ मंगलवार को श्री दरबार साहिब में हुआ, जहां श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में श्री झंडे जी को उतारने की प्रक्रिया संपन्न हुई। बुधवार को इसका आरोहण होगा, और साथ ही रामनवमी तक चलने वाला मेला भी शुरू हो जाएगा।

श्री झंडे जी का आरोहण: आस्था का महासंगम

श्री झंडे जी का आरोहण सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि दून की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। इस साल के मेले में भक्तों की संख्या बढ़ी हुई है और श्रद्धालुओं का जोश भी चरम पर है। सुबह सात बजे से ही श्री दरबार साहिब में श्री झंडे जी के आरोहण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। पहले चरण में झंडे जी को उतारा गया, और दोपहर दो से चार बजे तक श्रद्धालुओं की भक्ति के साथ यह ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ।

इस साल के मेले में एक खास बात यह है कि परंपरा के अनुसार इस बार श्री झंडे जी के ध्वजदंड को बदला जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक नया उत्साह लेकर आया है। इस अवसर पर श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को विशेष गुरुमंत्र दिया, जो उनके जीवन को प्रबुद्ध करने का संदेश देता है।

श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज का संदेश

मंगलवार को श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को आशीर्वाद दिया और गुरुमंत्र के साथ अपने उपदेशों से भक्तों को मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा, “जैसे सूर्य की किरणें सभी को समान रूप से प्रकाश और ऊष्मा देती हैं, वैसे ही एक आध्यात्मिक गुरु अपनी कृपा और करुणा सभी पर समान रूप से रखते हैं।” उनका यह संदेश न केवल भक्तों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बनता है, बल्कि समाज में मानवता और प्रेम का प्रचार भी करता है।

उनकी इस प्रेरणादायक बातों ने भक्तों के दिलों को छुआ और वे भक्ति के रंग में रंग गए। उनके अनुसार, धार्मिकता का असली मतलब है- सभी के प्रति समानता और प्रेम का भाव रखना। यह संदेश आज के समाज में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां समाज में बिखराव और असहमति की स्थिति बनी रहती है।

मुख्यमंत्री का शुभकामन संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री झंडे जी मेले के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा, “हर साल श्री गुरु राम राय जी के जन्मोत्सव पर परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला दून का ऐतिहासिक श्री झंडे जी मेला मानवता और विश्वास से ओतप्रोत विशिष्ट परंपराओं को समेटे हुए है।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक भी है। उनके अनुसार, यह मेला हमारे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और इसके माध्यम से लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और भाईचारे का संदेश साझा करते हैं।

मुख्यमंत्री ने श्री गुरु राम राय महाराज के जीवन और उनके संदेशों को अत्यंत प्रासंगिक बताया और कहा कि आज के समय में उनके विचारों की महत्ता और बढ़ गई है। गुरु राम राय की शिक्षाएं जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं, और उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज को सशक्त किया जा सकता है।

मेला और इसकी सांस्कृतिक महत्ता

श्री झंडे जी मेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह दून क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। यह मेला न सिर्फ भक्तों को धार्मिक अनुभव प्रदान करता है, बल्कि यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक समागम का भी एक बड़ा अवसर बन जाता है। रामनवमी तक चलने वाला यह मेला हर साल एक भव्य उत्सव का रूप लेता है, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

श्री झंडे जी मेला सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ मिलकर इस आयोजन में भाग लेते हैं। यह मेले का हिस्सा बनने से लोग न केवल धार्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं, बल्कि एक दूसरे के साथ मिलकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी करते हैं, जो समाज में प्रेम और सद्भावना का वातावरण बनाता है।

श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय अनुभव

इस साल के मेला आयोजन के दौरान, दून क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय समागम देखने को मिला है। स्थानीय निवासी और दूर-दूर से आए श्रद्धालु श्री झंडे जी के ध्वजारोहण को लेकर अत्यधिक उत्साहित हैं। भक्तों के दिलों में गहरी आस्था और श्रद्धा की लहर दौड़ रही है, और यह साफ देखा जा सकता है कि यह मेला दून की धार्मिक और सांस्कृतिक धारा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यह मेला न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समाज में सकारात्मकता और सौहार्द के संदेश को फैलाने का भी एक सशक्त माध्यम है। श्री झंडे जी का आरोहण श्रद्धा और भक्ति का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो समाज में समरसता और एकता की भावना को बढ़ावा देता है।

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