उत्तराखंड की नई आबकारी नीति 2025 को धामी कैबिनेट ने दी मंजूरी

उत्तराखंड राज्य में आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की नई आबकारी नीति 2025 को मंजूरी दे दी गई। इस नई नीति के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जो राज्य में मदिरा बिक्री की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देंगे। इस नीति में विभिन्न प्रकार की नई नियमावली और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए गए हैं।
प्रमुख प्रावधान और नियम
नई आबकारी नीति के तहत राज्य सरकार ने शराब की दुकानों और मदिरा बिक्री के मामले में कई कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने का प्रस्ताव किया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि अब किसी दुकान पर एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) से अधिक कीमत वसूलने पर उस दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। यह कदम उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया है ताकि उन्हें शराब खरीदते वक्त एमआरपी से अधिक कीमत न चुकानी पड़े।
इसके अलावा, डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी अब एमआरपी लागू किया जाएगा, जिससे उन स्थानों पर भी शराब की कीमतों पर नियंत्रण रखा जाएगा, जहां पर शराब बिक्री की जाती है। इस नीति का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सस्ते और न्यायसंगत मूल्य पर शराब मुहैया कराना है।
धार्मिक क्षेत्रों के पास शराब दुकानों का बंद होना
उत्तराखंड की नई आबकारी नीति में धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नीति के तहत सरकार ने निर्णय लिया है कि धार्मिक स्थलों और तीर्थ क्षेत्रों के पास स्थित शराब की दुकानों को बंद किया जाएगा। यह कदम धार्मिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि इन क्षेत्रों में शांति और धार्मिक माहौल बना रहे।
इस नीति के तहत शराब की उप-दुकानों और मेट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है। इससे राज्य में शराब की बिक्री को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और अवैध बिक्री पर भी अंकुश लगेगा।
आबकारी राजस्व में वृद्धि
पिछले दो वर्षों में राज्य में आबकारी राजस्व में काफी वृद्धि देखी गई है, और सरकार ने इसे लेकर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए एक उच्च लक्ष्य तय किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आबकारी विभाग कई रणनीतियाँ तैयार कर रहा है, जिनमें शराब बिक्री की मॉनिटरिंग और मदिरा के कड़े नियमन शामिल हैं।
पिछले वर्ष 2023-24 में राज्य ने 4000 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया था, जबकि उसने 4038.69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 4439 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, और अब तक लगभग 4000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है।
स्थानीय रोजगार और उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन
नई आबकारी नीति के तहत राज्य सरकार ने स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने का भी प्रस्ताव किया है। इसके अनुसार, थोक मदिरा की दुकानों के लाइसेंस केवल उत्तराखंड के निवासियों को दिए जाएंगे। यह कदम स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जिससे राज्य के लोग सीधे तौर पर इससे लाभान्वित हो सकेंगे।
इसके अलावा, पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट दी जाएगी। इससे राज्य के कृषकों और बागवानी क्षेत्र में काम करने वालों को आर्थिक लाभ मिलेगा, और राज्य के कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहन
सरकार ने मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ विशेष कदम उठाए हैं। इसके तहत निर्यात शुल्क में कटौती की गई है, जिससे राज्य में मदिरा उद्योग में निवेश बढ़ सके। इसके अलावा, माल्ट और स्प्रिट उद्योगों के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि इन उद्योगों का विस्तार हो और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकें।
इन कदमों से राज्य के आर्थिक विकास में तेजी आने की उम्मीद है, और मदिरा उद्योग में निवेश बढ़ने के साथ-साथ नई नौकरियों के सृजन की संभावना भी है।
राज्य के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम
इस नई आबकारी नीति के तहत उठाए गए कदम राज्य के आर्थिक विकास में योगदान देंगे। राज्य के कृषि और बागवानी क्षेत्रों के साथ-साथ मदिरा उद्योग में निवेश बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयासों से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा, सरकार ने धार्मिक स्थलों के पास शराब दुकानों को बंद करने का जो कदम उठाया है, वह राज्य के पर्यटन और धार्मिक क्षेत्रों के विकास के लिए भी एक सकारात्मक पहल है।
आबकारी राजस्व में वृद्धि की संभावना और सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार आबकारी नीति को और अधिक सशक्त बनाने के लिए तैयार है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके।