नगर निगम चुनाव में मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण आम नागरिकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री भी नहीं कर पाए मतदान

पिथौरागढ़ नगर निगम चुनाव में मतदाता सूची में नाम न होने की वजह से न केवल आम नागरिक बल्कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी मतदान करने से वंचित रह गए। यह घटना नगर निगम चुनाव के दौरान एक बड़ी समस्या के रूप में उभरी, जहां चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और लापरवाही के कारण मतदाता अपनी आवाज नहीं उठा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, जो चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए पिथौरागढ़ पहुंचे थे, दो दिन पहले ही नगर के पनलोट वार्ड में मतदान करने के लिए पहुंचे थे। हालांकि, जब उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम देखा, तो वह पाया कि उनकी जानकारी गलत थी, और अंततः उन्हें बिना मतदान किए ही लौटना पड़ा। यह मामला केवल उनकी ही समस्या नहीं था, बल्कि नगर निगम के कई वार्डों में मतदाता सूची में नाम न होने की शिकायतें सामने आईं।
पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का मतदान से वंचित रहना
भगत सिंह कोश्यारी, जिन्होंने राजनीति में कई महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार संभाला है, पिथौरागढ़ नगर निगम चुनाव में मतदान करने के लिए पंहुचे थे। वह पिथौरागढ़ के पनलोट वार्ड में वोट डालने के लिए तैयार थे, लेकिन जब उन्होंने मतदाता सूची देखी, तो उनके नाम की गलत प्रविष्टि के कारण वह मतदान नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें बिना मतदान किए ही अपने घर लौटना पड़ा। यह न केवल एक राजनीतिक नेता के लिए बल्कि सामान्य नागरिकों के लिए भी एक चौंकाने वाली घटना थी, क्योंकि इससे यह साफ हो गया कि नगर निगम के चुनावी प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो सकती है।
पिथौरागढ़ में मतदाता सूची में गड़बड़ी
पिथौरागढ़ नगर निगम के कई मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची में नाम न होने की समस्या ने आम मतदाताओं को भी परेशान किया। मतदान के दिन, लोगों को अपने नाम ढूंढने के लिए एक मतदान केंद्र से दूसरे मतदान केंद्र तक दौड़ते हुए देखा गया। कई मतदाताओं ने शिकायत की कि उनके नाम मतदाता सूची में नहीं थे, जबकि वे पूरी तरह से योग्य मतदाता थे। कुछ स्थानों पर तो नामों में गड़बड़ी भी देखने को मिली, जिससे मतदाताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना था कि इस बार मतदाता सूची में घोर लापरवाही बरती गई है और इसकी वजह से चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ा है। इसके कारण न केवल आम नागरिकों, बल्कि प्रभावशाली व्यक्तित्वों को भी अपनी बुनियादी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने से वंचित रहना पड़ा।
लापरवाही की शिकायतें
पिथौरागढ़ नगर निगम चुनाव में मतदान से वंचित रह गए लोगों ने प्रशासन और निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि मतदाता सूची तैयार करने में घोर लापरवाही बरती गई है, जिससे न केवल चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन भी हो रहा है। मतदाता सूची में गड़बड़ी की वजह से लोग सही तरीके से मतदान करने में असमर्थ हो गए, और कई लोगों को तो पूरी तरह से निराश होकर मतदान केंद्र से लौटना पड़ा।
स्थानीय नागरिकों का कहना था कि वे कई बार चुनावी अधिकारीयों से शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं पा सके। मतदाता सूची में नाम की गड़बड़ी को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष की भावना बढ़ी।
चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है, खासकर मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए। नगर निगम चुनाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में मतदाता सूची में गड़बड़ी से न केवल मतदाताओं का अधिकार प्रभावित होता है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आती है।
निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अधिक सावधानी बरतनी होगी और मतदाता सूची को पहले से ही सत्यापित किया जाना चाहिए। साथ ही, लोगों को समय रहते सूचित किया जाना चाहिए, ताकि वे मतदान केंद्र पहुंचने पर किसी भी प्रकार की समस्या से न जूझें।
नागरिकों का रुख
इस घटनाक्रम के बाद, पिथौरागढ़ के नागरिकों ने चुनावी अधिकारियों से मांग की है कि वे इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को इस पूरे मामले में जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मतदाता सूची में सुधार करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को सहायता प्रदान करने के लिए बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।