Uttarakhand

उत्तरकाशी में शनिवार को फिर महसूस हुए भूकंप के झटके, 24 घंटों में चौथी बार दहशत

उत्तरकाशी: शनिवार की सुबह उत्तरकाशी में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह झटका शुक्रवार को हुए तीन भूकंपों के बाद चौथी बार आया, जिससे लोग भयभीत हो गए। शनिवार को करीब 5:48 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 2.04 मापी गई। भूकंप का केंद्र तहसील डुण्डा के ग्राम खुरकोट और भरणगांव के बीच स्थित वन क्षेत्र था।

हालांकि, फिलहाल इस भूकंप से जिले में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन लगातार भूकंप के झटके लोगों में दहशत का कारण बन रहे हैं। उत्तरकाशी में शनिवार के भूकंप के झटके शुक्रवार को हुए भूकंपों से कुछ घंटे बाद महसूस हुए थे, जो कि लगातार चार बार आने वाले भूकंपों के कारण स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं।

शुक्रवार को भी तीन बार आए थे भूकंप के झटके

उत्तरकाशी में शुक्रवार, 24 जनवरी को भी तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इन झटकों ने पहले से ही सतर्क और घबराए हुए नागरिकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया था। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, शुक्रवार सुबह 7:41 बजे भूकंप आया था जिसकी तीव्रता 2.7 थी। इसके बाद 8:19 बजे फिर से एक हल्का झटका महसूस किया गया, जो रिएक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता का था। इसके अलावा, पौने ग्यारह बजे भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।

इस महीने में राज्य के बागेश्वर जिले में भी भूकंप के झटके महसूस हुए थे। बागेश्वर में 10 जनवरी को रात करीब एक बजे के आसपास भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 2.2 मापी गई थी। इसके अलावा, दिसंबर 2024 में भी राज्य में भूकंप के कई झटके महसूस हुए थे, जिनमें मणिपुर, उत्तराखंड और असम में प्रमुख रूप से भूकंप आए थे।

दिसंबर 2024 में राज्य में भूकंप के आंकड़े

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के द्वारा जारी किए गए एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2024 में भारत में कुल 44 भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। इनमें सबसे अधिक मणिपुर में छह भूकंप आए थे। इसके बाद उत्तराखंड और असम में पांच-पांच भूकंप महसूस किए गए थे। उत्तराखंड का यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, और लगातार भूकंप के झटकों का आना इस बात का संकेत है कि यहां पर भूगर्भीय गतिविधियों में कुछ असमान्यता हो सकती है।

उत्तरकाशी में आपदा प्रबंधन उपाय

उत्तरकाशी में लगातार भूकंप के झटके आने के कारण जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए विभिन्न कदम उठाने की शुरुआत की है। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव, विनोद कुमार सुमन ने बताया कि आपदा की पूर्व सूचना देने के लिए “अर्ली वार्निंग सिस्टम” पर काम किया जा रहा है। इसके तहत जल्द ही भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, वरुणावत पर्वत के भूकंपीय अध्ययन और संरक्षण के लिए पांच करोड़ रुपये की राशि जारी करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन ने भेजा है। यह राशि जल्द ही जारी की जाएगी, ताकि पर्वतीय क्षेत्र में भूकंप की संभावना से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

भूकंप क्यों आते हैं?

पृथ्वी के अंदर सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स हैं, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो उन स्थानों को “फॉल्ट लाइन” कहते हैं। इन प्लेट्स के टकराने से काफी दबाव उत्पन्न होता है। जब प्लेट्स के बीच जमा हुआ दबाव बहुत अधिक हो जाता है, तो ये टूटने लगती हैं, और अचानक से ऊर्जा बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढ़ती है। इस ऊर्जा के बाहर निकलने के कारण भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

इस तरह की भूकंपीय गतिविधि उत्तरकाशी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सामान्य है क्योंकि यह क्षेत्र प्रमुख फॉल्ट लाइन के पास स्थित है, जिससे भूकंप के झटकों की संभावना बनी रहती है।

भूकंप के प्रभाव से निपटने के उपाय

उत्तरकाशी जैसे भूकंपीय रूप से संवेदनशील इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए कई सुरक्षा उपायों की जरूरत होती है। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही भूकंप के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक किया है। इसके अलावा, भवनों और अन्य संरचनाओं को भूकंप प्रतिरोधी बनाने के लिए निर्माण कार्यों में भी सावधानियां बरती जा रही हैं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया है कि उत्तरकाशी और उत्तराखंड के अन्य भूकंपीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भूकंप के झटकों की निगरानी की जा रही है और भूकंप के संभावित झटकों के लिए एक प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा रही है।

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