Uttarakhand

राज्यपाल गुरमीत सिंह और CM धामी ने उत्तर प्रदेश के CM योगी की भतीजी की शादी में लिया भाग

उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को पंचूर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भतीजी की शादी में भाग लिया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया और राज्य की समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद, उन्होंने कांडी गांव में स्व. चंद्रमोहन नेगी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम राज्य के प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं में से एक रहा।

1. राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत

राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए पंचूर गांव में उच्च पदस्थ अधिकारी और नेता उपस्थित थे। हेलीपैड से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री पंचूर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने शादी समारोह में भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड की राजनीति और समाजिक हलकों में चर्चा का विषय यह रहा कि राज्य के प्रमुख नेता अपने राज्य के बाहर की महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवारों के साथ इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों में भाग लेते हैं।

हेलीपैड पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, विधायक रेनू बिष्ट, जिलाध्यक्ष वीरेंद्र रावत, मीरा रतूड़ी, डीएम पौड़ी डॉ. आशीष चौहान, और विनीता लखेड़ा समेत कई स्थानीय और राज्य स्तरीय नेता उपस्थित थे। यह समारोह उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से भी जुड़े एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा था।

2. शादी समारोह और आशीर्वाद

शादी समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वर-वधू को अपनी शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा, “इस विशेष अवसर पर हम सभी परिवारों और समुदायों के बीच प्यार और सामूहिक सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए एकजुट हैं। हम यहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवार के इस खुशी के अवसर का हिस्सा बनकर बहुत प्रसन्न हैं।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नवदंपती को बधाई दी और कहा, “यह एक खुशी का दिन है, और हम सभी यहां इस विशेष अवसर पर सामूहिक रूप से शामिल होकर आशीर्वाद देने आए हैं। यह दिन उनके जीवन का सबसे अच्छा दिन होगा, और हम उनकी खुशहाल और समृद्धि की कामना करते हैं।”

इस शादी में भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद अनिल बलूनी और त्रिवेंद्र सिंह रावत भी मौजूद थे, जिन्होंने समारोह को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। उनके अलावा, राज्य के अन्य प्रमुख नेता और अधिकारी भी इस समारोह में सम्मिलित हुए, जो इस आयोजन को और भी प्रभावशाली बना गए।

3. कांडी गांव में स्व. चंद्रमोहन नेगी की श्रद्धांजलि

शादी समारोह के बाद, राज्यपाल और मुख्यमंत्री कांडी गांव गए, जहां उन्होंने स्व. चंद्रमोहन नेगी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व. चंद्रमोहन नेगी को राज्य की राजनीति में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है, और उनकी मूर्ति पर श्रद्धांजलि अर्पित करना इस समाजिक और राजनीतिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ कई अन्य नेता भी इस श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मौजूद थे, और सभी ने मिलकर स्व. चंद्रमोहन नेगी के योगदान को याद किया। यह आयोजन स्थानीय समाज के लिए एक आदर्श स्थापित करने वाला था, जहां समर्पण और सेवा की भावना को सम्मानित किया गया।

4. राज्यपाल और मुख्यमंत्री का महत्व

राज्यपाल ले. जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पंचूर गांव यात्रा ने यह साबित किया कि राज्य की राजनीति और समाजिक आयोजनों में राज्य के प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति कितनी महत्वपूर्ण होती है। इसके साथ ही, इस कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच का सामंजस्य और सहयोग कितना मजबूत है, खासकर जब बात सामाजिक समारोहों और आयोजनों की हो।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ही अपनी भूमिकाओं में राज्य के विकास और समृद्धि के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उनके बीच की सहयोग भावना और पारस्परिक सम्मान ने उत्तराखंड में सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा दिया है।

5. कार्यक्रम की सफलता और प्रतिक्रियाएं

पंचूर गांव में आयोजित यह शादी समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम न केवल राज्य के नेताओं के बीच सामूहिक भावना को बढ़ावा देने वाला था, बल्कि इसने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच अच्छे राजनीतिक संबंधों की स्थापना को भी दर्शाया। नेताओं और अधिकारियों द्वारा इस आयोजन की सराहना की गई, और स्थानीय निवासियों ने इसे एक यादगार अनुभव के रूप में देखा।

शादी के बाद, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने पंचूर से वापस लौटने की योजना बनाई, और करीब तीन बजे वे वहां से रवाना हो गए। यह यात्रा राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक संकेत थी, जो आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में और भी बदलाव ला सकती है।

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