Uttarakhand

चमोली जिले में अचानक पहाड़ी टूटने से हेमकुंड साहिब का पुल क्षतिग्रस्त, हिमस्खलन का खतरा बरकरार

चमोली जिले के गोविंदघाट में आज सुबह एक बड़ी प्राकृतिक आपदा घटित हुई, जब अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा। इस घटना ने हेमकुंड साहिब को जोड़ने वाले पुल को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे वहां यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गईं। इस दुर्घटना के बाद इलाके में भारी तबाही का अंदेशा था, साथ ही मौसम विभाग ने हिमस्खलन का खतरा बरकरार रहने की चेतावनी दी है।

हिमस्खलन का खतरा और मौसम की स्थिति

इस घटना से पहले, मंगलवार को भी चमोली जिले का मौसम खराब रहा था। जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और अन्य पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी हुई, जबकि निचले क्षेत्रों में तेज बारिश ने ठंड बढ़ा दी। इस कारण जिले भर में कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। हालांकि, पूर्वाह्न 11 बजे तक मौसम में थोड़ा सुधार हुआ और धूप भी निकली, लेकिन जैसे ही शाम आई, मौसम फिर से बिगड़ गया।

मौसम विभाग ने 8 मार्च से मौसम में और बदलाव के संकेत दिए हैं, जिससे हिमस्खलन और बर्फबारी की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में यात्रा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है, और अधिकारियों ने यात्रियों को आगाह किया है कि वे आवश्यक सतर्कता बरतें।

बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित

बदरीनाथ धाम, ज्योतिर्मठ और औली जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और ठंड से जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से, बदरीनाथ धाम में अधिकतम तापमान माइनस आठ डिग्री और न्यूनतम तापमान माइनस तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरा। ज्योतिर्मठ में अधिकतम तापमान चार डिग्री और न्यूनतम तापमान माइनस एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि औली में अधिकतम तापमान तीन डिग्री और न्यूनतम तापमान माइनस दो डिग्री सेल्सियस था।

तापमान में यह भारी गिरावट दिनभर लोगों को अपने घरों में दुबकने पर मजबूर कर रही है। जिले के निवासियों ने ठंड के कारण अपने दैनिक कार्यों को प्रभावित होते देखा है, और लोग गर्म कपड़ों में लिपटे रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बर्फबारी और पहाड़ी घटनाओं का असर

चमोली जिले में लगातार बर्फबारी और पहाड़ी घटनाएं होने से न केवल स्थानीय लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र भी मुश्किल में है। विशेष रूप से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, इस मौसम में बर्फबारी के कारण यात्रियों के लिए यात्रा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

साथ ही, चमोली जिले में हो रहे हिमस्खलन के कारण सड़क यातायात भी प्रभावित हो रहा है। पहाड़ी रास्तों पर बर्फ के गिरने से रास्ते बंद हो रहे हैं और मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं। गोविंदघाट के पास हुए हादसे से पुल का क्षतिग्रस्त होना इस बात का संकेत है कि यहां स्थितियों को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरती जा सकती है।

प्रशासन की तैयारी

चमोली प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा करने से बचें और सुरक्षा के सभी उपायों का पालन करें। इसके अलावा, जिले में हर प्रकार की आपातकालीन सेवाओं की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन दलों को तैनात किया है, जो इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए तत्पर हैं।

मौसम विभाग ने हिमस्खलन के खतरे को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के निवासियों और यात्रियों से सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, यातायात व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए विभाग ने तत्काल सड़कों को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

8 मार्च से मौसम में बदलाव की आशंका

मौसम विभाग ने 8 मार्च से मौसम में और बदलाव का संकेत दिया है, जिसके तहत अधिक बर्फबारी और बारिश की संभावना जताई जा रही है। इससे हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं, और कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड का सामना करना पड़ सकता है। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि यात्रा करने वाले लोग मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा के लिए उचित तैयारी करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

प्रभावित क्षेत्रों और जीवन के प्रति प्रभावित असर

बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और औली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल बर्फबारी से प्रभावित हुए हैं। यहां के निवासी और श्रद्धालु तापमान में अत्यधिक गिरावट के कारण परेशान हैं। लोग घरों में गर्म कपड़ों में लिपटे हुए हैं और आग तापने के लिए लकड़ी जलाने का सहारा ले रहे हैं। ठंड के चलते बच्चे और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में तापमान अत्यधिक गिरने के कारण स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

साथ ही, इस समय क्षेत्र में यात्रा करने की योजना बना रहे पर्यटकों को मौसम के बदलाव और बर्फबारी की स्थिति के कारण किसी भी प्रकार के जोखिम से बचने के लिए योजना बनानी चाहिए।

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