प्रदेश के 100 निकायों के चुनाव में मतदाता सूची की गड़बड़ी ने मतदाताओं को किया परेशान

प्रदेश के 100 निकायों के चुनाव में मतदाता सूची एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी की गई सूची में न केवल नामों की गड़बड़ी हुई है, बल्कि कई मतदाता तो खुद को लिंग या परिवार संबंधी जानकारी में भी भ्रमित पाते हैं। आयोग ने इस बार मतदाता सूची को ऑनलाइन पीडीएफ के रूप में उपलब्ध कराने के साथ-साथ एक नई सुविधा दी थी, जिसमें लोग अपने नाम को सीधे वेबसाइट पर खोज सकते थे। लेकिन यह सुविधा भी अधिकांश मतदाताओं के लिए राहत नहीं दे सकी और उलझन का कारण बन गई।
चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की अहमियत
राज्य निर्वाचन आयोग ने पहली बार मतदाताओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन मतदाता सूची उपलब्ध कराई थी। इस पहल का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और आसान बनाना था। इसके तहत मतदाता सूची को पीडीएफ में प्रकाशित किया गया था, जिससे मतदाता अपने नाम को आसानी से ढूंढ सकें। इसके अलावा, नाम के सर्च ऑप्शन के जरिए, कोई भी मतदाता सीधे अपनी जानकारी देख सकता था और यह जान सकता था कि वह अपनी विधानसभा, नगर पालिका, या स्थानीय निकाय के चुनाव में वोट डालने के लिए योग्य है या नहीं।
परंतु, इस प्रयास का उल्टा असर हुआ, जब चुनावी प्रक्रिया में लोगों ने पाया कि मतदाता सूची में कई गंभीर गड़बड़ियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बहुत से मतदाता अपना नाम ही नहीं ढूंढ पाए, क्योंकि सूची में नामों की क्रमबद्धता गड़बड़ थी। जब सूची में अपना नाम ढूंढने गए तो उन्हें अन्य स्थानों पर अपने नाम मिले, जिससे वे भ्रमित हो गए और कई मतदाता तो वोट डालने में असमर्थ रहे।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के उदाहरण
मतदाता सूची में गड़बड़ी के कुछ खास उदाहरण सामने आए, जिनमें मतदाताओं को अपनी पहचान ही बदलती हुई मिली। कई मामलों में मतदाताओं का लिंग गलत दर्ज किया गया, जिससे उन्हें मतदान में समस्या का सामना करना पड़ा। जैसे कि एक रंजन नामक व्यक्ति का नाम सूची में रजनी के रूप में दर्ज हो गया, तो वहीं एक बबलू का नाम बबली के रूप में सामने आया। ऐसे मामलों के कारण वे वोट डालने में असमर्थ रहे।
इसी तरह, कई और गड़बड़ियों की रिपोर्ट सामने आई, जिनमें मतदाता का नाम और उसके पिता का नाम एक-दूसरे से बदल दिए गए थे। इस प्रकार के गड़बड़ नामकरण से मतदाता मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गए, और उन्हें अपने मतदान अधिकार का उपयोग करने का मौका नहीं मिला।
मतदान में असमंजस और परेशानियां
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार विधानसभा-लोकसभा चुनावों से अलग एक अलग मतदाता सूची तैयार की थी, और इसके लिए विशेष अभियान भी चलाए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया था कि निकाय चुनाव की प्रक्रिया अलग होती है और इसमें वोट बनवाने की प्रक्रिया भी अलग है। हालांकि, बड़ी संख्या में मतदाता इस जानकारी से अनजान थे और वे यह नहीं जानते थे कि उन्हें निकाय चुनाव के लिए एक अलग मतदाता सूची में अपना नाम चेक करना होगा।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और असमंजस की वजह से प्रदेशभर के मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कई मतदाताओं ने शिकायत की कि उनके नाम लोकसभा चुनाव के लिए सूची में तो थे, लेकिन निकाय चुनाव के लिए उनका नाम सूची में नहीं था। इससे मतदाता भ्रमित हो गए और चुनाव प्रक्रिया में अपनी हिस्सेदारी नहीं कर सके।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रतिक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस पूरे मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि गड़बड़ी को शीघ्र सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। आयोग ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए, संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने और मतदाता सूची को अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, और मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।
आयोग ने यह भी बताया कि जल्द ही इस मामले में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों से बचने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। आयोग ने निवेदन किया है कि मतदाता आगामी चुनावों में अपनी जानकारी को अपडेट रखें और चुनावी प्रक्रिया में सम्मिलित होने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।
मतदाताओं के लिए क्या किया जा सकता है?
इस प्रकार की गड़बड़ियों के समाधान के लिए सबसे पहला कदम यह है कि राज्य निर्वाचन आयोग मतदाताओं को हर स्तर पर सटीक जानकारी दे। विशेषकर, लोकसभा और निकाय चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची की व्यवस्था के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ, मतदान के दिन भी मतदाताओं को पूरी जानकारी प्रदान की जाए कि यदि उनकी जानकारी सूची में सही नहीं है, तो वे किस प्रकार से सुधार कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, आयोग को अपनी वेबसाइट और पीडीएफ प्रणाली को और अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाना होगा। वेबसाइट पर अगर कोई गड़बड़ी हो तो उसे जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि मतदान प्रक्रिया में कोई विघ्न न आए। इसके अलावा, मतदान केंद्रों पर बेहतर सहायता टीम भी तैनात की जानी चाहिए, ताकि यदि कोई मतदाता किसी गड़बड़ी का सामना करता है, तो उसे तुरंत समाधान मिल सके।