Uttarakhand

नेता प्रतिपक्ष का बयान “विपक्ष की सरकार से मांग, सत्र की अवधि बढ़ाई जाए”

देहरादून – नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल विपक्ष के विधायकों को बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायकों को भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाने का समय मिलेगा। इस पर विपक्ष ने कार्यमंत्रणा की बैठक में कम से कम दो सप्ताह तक सत्र चलाने का आग्रह किया।

सत्र की अवधि बढ़ाने की आवश्यकता, नहीं तो क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा संभव नहीं

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर सत्र की अवधि को छोटा रखा गया तो विधायक अपने क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में नहीं उठा पाएंगे। वह आशंका जताते हुए कहते हैं, “सरकार के पास संख्या बल होने के कारण सत्र के एजेंडे का निर्धारण भी किया जा रहा है, जो केवल कुछ ही मुद्दों पर केंद्रित होता है। अगर सत्र केवल तीन से चार दिन का होता है, तो यह बेहद सीमित समय रहेगा और विधायकों को अपने क्षेत्र के मुद्दों को उठाने का मौका नहीं मिलेगा।”

नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, कांग्रेस की ओर से सत्र की अवधि बढ़ाने के लिए सदन से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि बजट सत्र का समय बहुत छोटा रखा जा रहा है और इससे राज्य की जनता की समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हो पाएगी।

राज्यपाल का अभिभाषण – सरकार की नीतियों का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं

नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह अभिभाषण सरकार के दस्तावेज और रोडमैप के रूप में होता है, लेकिन इसमें राज्य के ज्वलंत मुद्दों जैसे पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, और आपदा से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति या विजन नहीं दिया गया है।

“राज्यपाल का अभिभाषण जनता को यह विश्वास दिलाने का एक अवसर होता है कि सरकार उनके मुद्दों को गंभीरता से ले रही है, लेकिन इस बार के अभिभाषण में किसी भी प्रकार का स्पष्ट दिशा-निर्देश या समाधान नहीं दिखता। पलायन और शिक्षा जैसे बड़े मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाए जाने की बजाय केवल कागजी आश्वासन दिए जा रहे हैं।”

विपक्ष की ओर से उठाए जाएंगे ये मुद्दे

विपक्ष के नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वे आगामी सत्र में प्रमुख मुद्दों को उठाने की योजना बना रहे हैं। इन मुद्दों में शामिल हैं:

  • भू-कानून : प्रदेश में भू-माफिया और जमीनों की लूट-खसोट पर नियंत्रण के लिए भू-कानून लागू करने की मांग की जाएगी।
  • स्मार्ट मीटर : स्मार्ट मीटर के मुद्दे को लेकर भी विपक्ष सत्ताधारी दल से जवाब मांगने की योजना बना रहा है, क्योंकि यह मुद्दा आम जनता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
  • गन्ना किसानों का भुगतान : गन्ना किसानों को समय पर भुगतान न होने की समस्या को विधानसभा में उठाया जाएगा।
  • आपदा प्रभावितों का पुनर्वास : प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया पर भी गंभीर चर्चा की जाएगी।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा : स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं में सुधार के लिए विपक्ष सख्त कदम उठाने की मांग करेगा।

मूल निवास और भू-कानून को लागू करने की आवश्यकता

निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में मूल निवास और भू-कानून को लागू किया जाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि प्रदेश में माफिया की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए, यदि भू-कानून लागू किया जाता है, तो यह प्रदेश के विकास और स्थिरता के लिए फायदेमंद होगा।

“उत्तराखंड में माफिया से जमीन बचती है और लूट-खसोट की समस्या सामने नहीं आती है तो भू-कानून को लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए मूल निवास कानून भी लागू किया जाना चाहिए। यह कदम प्रदेश के लोगों की जनभावना के अनुरूप होगा।”

उमेश कुमार ने आगे कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है और इस विषय पर राज्य सरकार से सकारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा की है।

उमेश कुमार पर लगे मुकदमे – उनका स्पष्टीकरण

विधायक उमेश कुमार पर कुछ मुकदमे होने का सवाल भी उठाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ 19 नहीं केवल तीन मुकदमे हैं। उनका कहना था कि उन्होंने दुबई जाने के लिए कोर्ट से अनुमति ली थी और इसे लेकर कुछ गलतफहमियां पैदा की जा रही हैं।

“मैंने दुबई यात्रा के लिए कोर्ट से वैध अनुमति ली थी और उन पर केवल तीन मुकदमे हैं। बाकी आरोप गलत हैं।”

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