PM मोदी की CM धामी को सलाह, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान उत्तरकाशी जिले के मुखबा और हर्षिल गांवों का दौरा किया। इस दौरे में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले मुखबा में मां गंगा की पूजा अर्चना की और देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद हर्षिल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तराखंड के पर्यटन को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और कंटेंट क्रियेटरों से अपील की कि वे उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं।
प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड दौरा: एक ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड दौरा प्रदेश के विकास और पर्यटन के लिए एक ऐतिहासिक घटना बन गया। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले उत्तरकाशी जिले के मुखबा गांव में स्थित गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की। इस पूजा के दौरान उन्होंने करीब 20 मिनट तक मां गंगा की विशेष पूजा की और आशीर्वाद लिया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगा ने उन्हें हमेशा आशीर्वाद दिया है और वह महसूस करते हैं कि गंगा ने उन्हें अपनी गोद में ले लिया है।
मुखबा में पूजा अर्चना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हर्षिल गांव की ओर रुख किया, जहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के विकास और पर्यटन को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना जरूरी है, और इसके लिए सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अहम भूमिका निभा सकते हैं।
उत्तराखंड में पर्यटन को वैश्विक पहचान देने का प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई नए और प्रभावी कदमों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और कंटेंट क्रियेटर को इस दिशा में एक अहम भूमिका निभानी चाहिए। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया कि वह सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित करें, जिसमें वे उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन पर शॉर्ट फिल्म बनाएं। उन्होंने कहा, “जो शॉर्ट फिल्म सबसे अच्छी होगी, उसे इनाम दिया जाएगा। इससे प्रदेश के खूबसूरत स्थलों की जानकारी और ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और प्रदेश में और भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे 50 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने पर ध्यान दें, ताकि राज्य को पर्यटन के क्षेत्र में और भी बढ़ावा मिले।
कॉरपोरेट जगत को भी उत्तराखंड की ओर आकर्षित करने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में कॉरपोरेट घरानों से आग्रह किया कि वे अपनी बैठकों और कॉन्फ्रेंस के लिए उत्तराखंड का चयन करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का खूबसूरत वातावरण और शांति कॉरपोरेट बैठकों के लिए एक आदर्श स्थान हो सकता है। इससे न केवल राज्य को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि यहां के स्थानीय व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को उत्तराखंड में विंटर योगा सेशन आयोजित करने के लिए प्रयास करना चाहिए। इसके माध्यम से सर्दियों में भी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है और उत्तराखंड के पर्यटन को साल भर बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर योग सेशन आयोजित किए जाएं, जिससे पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव मिल सके।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर कोना सुंदर है, और यहां की वादियां, पहाड़, झीलें और नदियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। खासकर हर्षिल और मुखबा जैसे गांवों की शांति और खूबसूरती को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि इन स्थानों को और भी ज्यादा प्रचारित किया जाना चाहिए ताकि दुनिया भर से पर्यटक इन जगहों का अनुभव लेने के लिए आएं।
प्रधानमंत्री ने हर्षिल में ट्रैकिंग और बाइक रैली को भी फ्लैग ऑफ किया, जो युवाओं को उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन से जोड़ने का एक प्रयास था। उन्होंने उत्तराखंड के पर्यटन को एक नए मुकाम तक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोगों को भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल होने की अपील की।
स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया
प्रधानमंत्री मोदी का पहाड़ों के प्रति विशेष प्रेम है, और उन्होंने उत्तराखंड के स्थानीय व्यंजनों का भी आनंद लिया। मुखबा में स्थानीय महिलाओं ने पीएम मोदी को चीणा का भात, फाफरे के पोले, राजमा और बद्री गाय के दही मठ्ठा जैसे पहाड़ी व्यंजन परोसे। इन व्यंजनों का स्वाद लेकर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति की सराहना की और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात की।