उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर गरमाई राजनीति, भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बजट सत्र में पेश करने की पुष्टि की

उत्तराखंड में भू-कानून की मांग लंबे समय से उठ रही है, और यह मुद्दा इन दिनों राज्य की राजनीति में काफी गरमाया हुआ है। पहाड़ के लोग लगातार अपने जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े भू-कानून की मांग कर रहे हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी को नुकसान न हो। इस बीच, राज्य के भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया है कि बजट सत्र में भू-कानून को लेकर राज्य सरकार जन भावनाओं के अनुरूप ठोस कदम उठाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने एक प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भू-कानून को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुकी है और बजट सत्र में यह कानून पेश किया जाएगा। उनका कहना था कि राज्य सरकार ने भू-कानून से पहले उन मामलों की पूरी जांच कर ली है, जिनमें भूमि के गलत इस्तेमाल या उल्लंघन के आरोप थे। इस जांच को जिलाधिकारी स्तर पर पूरा किया गया है और अब ऐसी जमीनें राज्य सरकार के नियंत्रण में आ जाएंगी।
महेंद्र भट्ट ने कहा, “हम राज्यवासियों की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही राज्य में कड़े भू-कानून की आवश्यकता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं, और अब बजट सत्र में यह कानून पेश होगा। सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।”
कांग्रेस और भू-कानून: एक पुरानी बहस
कांग्रेस ने हमेशा से राज्य के सांस्कृतिक संरक्षण और डेमोग्राफी को लेकर सवाल उठाए हैं। महेंद्र भट्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस आज भू-कानून को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन जब वह सत्ता में थी तो उसने कभी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी में बदलाव से संबंधित कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाना उचित है क्योंकि उसने अपने कार्यकाल के दौरान इस महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज किया।
भट्ट ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य की पहचान को बचाने के लिए कभी गंभीर नहीं रही, और अब जब भाजपा इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है, तो कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। “हमारी पार्टी राज्य की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी में बदलाव के खिलाफ है, और हम इसे बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे,” उन्होंने कहा।
भू-कानून की आवश्यकता और महत्व
उत्तराखंड में भू-कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। पहाड़ी इलाकों में बाहरी व्यक्तियों द्वारा जमीनों की खरीद-फरोख्त की बढ़ती घटनाओं ने राज्यवासियों में असंतोष और चिंता पैदा कर दी है। इन इलाकों के लोग अपनी जमीनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि बाहरी लोग यहां की कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, कई बार देखा गया है कि बाहरी लोग राज्य में आकर भूमि खरीदते हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना पर असर पड़ता है।
उत्तराखंड की सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और कड़े भू-कानून की तैयारी की है। इस कानून का उद्देश्य राज्य के भीतर बाहरी व्यक्तियों के अनधिकृत भूमि अधिग्रहण को रोकना, पहाड़ी क्षेत्र की पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा करना, और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है।
सरकार की प्रतिबद्धता और योजनाएं
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता राज्यवासियों की भूमि की रक्षा करना है। इसके लिए सरकार ने पूर्व में कई कदम उठाए हैं और भू-कानून को लागू करने से पहले जिलाधिकारी स्तर पर भूमि के गलत इस्तेमाल या उल्लंघन के मामलों की जांच पूरी कर ली गई है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में भू-कानून लागू करने से पहाड़ी क्षेत्रों के लोग अपनी जमीनों को सुरक्षित महसूस करेंगे और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सीएम पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार इस बात को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं कि राज्य में बाहरी तत्वों द्वारा जमीनों की खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाएंगे। सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और हर नागरिक की भूमि को उसकी रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस ने जहां एक ओर भू-कानून की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए कभी इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए। कांग्रेस ने कभी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया कि राज्य में बाहरी लोग जमीनों पर कब्जा कर सकते हैं और राज्य की सांस्कृतिक संरचना को खतरे में डाल सकते हैं।
भाट ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अब जब भाजपा इस मामले में सख्ती दिखा रही है, तो कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। “कांग्रेस को अपनी कथनी और करनी में अंतर पर विचार करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
भू-कानून को लेकर आम लोगों की राय
उत्तराखंड में भू-कानून को लेकर आम जनता में भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इस कानून को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे राज्य के विकास में बाधा डालने वाला कदम मानते हैं। कई लोग यह भी मानते हैं कि भू-कानून के तहत पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि का अनधिकृत तरीके से अधिग्रहण रोका जा सकता है, जिससे राज्य के स्थानीय लोगों को अपनी जमीनों पर कब्जा बनाए रखने में मदद मिलेगी।