Uttarakhand

उत्तराखंड में मौसम के बदलाव की संभावना, 26 और 27 फरवरी को बारिश और बर्फबारी का अलर्ट

उत्तराखंड में फरवरी के अंत में एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना जताई जा रही है। भले ही दो दिन से मौसम साफ हो, लेकिन मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 और 27 फरवरी के लिए बारिश और बर्फबारी का येलो अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के अधिकांश इलाकों में रुक-रुक कर मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। ठंडी हवाओं के असर से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके चलते बारिश और बर्फबारी के आसार बन रहे हैं।

26 और 27 फरवरी को बारिश और बर्फबारी की संभावना

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 26 फरवरी को देहरादून, उत्तरकाशी, और टिहरी जिले के कुछ हिस्सों में तेज गर्जन के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा, पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं। बर्फबारी होने से तापमान में और भी गिरावट की संभावना है।

प्रदेश के अधिकांश इलाकों में हल्की बारिश

वहीं, 27 फरवरी को बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर जिले को छोड़कर पूरे उत्तराखंड में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी की स्थिति बनी रहने से समूचे प्रदेश में तापमान में गिरावट आ सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है, जो अगले दो दिनों तक जारी रह सकता है।

तापमान में गिरावट की संभावना

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय प्रदेश में ठंडी हवाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे तापमान में गिरावट आई है। 26 और 27 फरवरी को होने वाली बारिश और बर्फबारी का असर प्रदेश के तापमान पर साफ तौर पर देखा जाएगा। इसके बाद 28 फरवरी से मौसम साफ होने की उम्मीद है, जिससे ठंड की स्थिति में भी कुछ राहत मिल सकती है।

उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण उत्तराखंड में मौसम का यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह विक्षोभ उत्तराखंड के ऊपर से गुजरता है और इसके चलते प्रदेश में बारिश और बर्फबारी जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। ऐसे में प्रदेश के उच्च इलाकों में बर्फबारी के अलावा मैदानी इलाकों में हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।

बर्फबारी से बढ़ेगी ठंड

विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी का असर सीधे तौर पर तापमान पर पड़ता है। जैसे-जैसे बर्फबारी बढ़ेगी, ठंड की स्थिति और अधिक कड़ी हो सकती है। खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इस समय, प्रदेश के अधिकतर इलाकों में मौसम ठंडा बना हुआ है, और बर्फबारी होने से ठंड बढ़ने की संभावना है।

प्रशासन और मौसम विभाग की तैयारियां

मौसम विभाग के अलर्ट के बाद प्रशासन ने भी जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी के चलते रास्तों के बंद होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने मार्गों की सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। इसके साथ ही, नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान यात्रा करते समय सतर्क रहें और पर्वतीय इलाकों में जाने से बचें यदि आवश्यकता न हो।

28 फरवरी के बाद मौसम में सुधार

मौसम विभाग के अनुसार, 28 फरवरी से उत्तराखंड में मौसम साफ हो जाएगा और ठंड का प्रभाव कुछ हद तक कम हो जाएगा। हालांकि, 28 फरवरी से बाद की स्थितियों के बारे में मौसम विभाग अभी कुछ खास जानकारी नहीं दे पाया है, लेकिन फिलहाल के अनुमान के अनुसार प्रदेश में बारिश और बर्फबारी का असर 27 फरवरी तक रहेगा।

उत्तराखंड के मौसम पर पश्चिमी विक्षोभ का असर

उत्तराखंड में मौसम में आए इस बदलाव को पश्चिमी विक्षोभ का असर माना जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ एक तरह का मौसम परिवर्तन है, जो उत्तर पश्चिमी भारत और हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करता है। जब यह विक्षोभ सक्रिय होता है, तो यह बारिश और बर्फबारी की स्थितियां उत्पन्न करता है, जिससे तापमान में गिरावट और ठंड का असर बढ़ता है।

इस विक्षोभ के कारण उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में 26 और 27 फरवरी को मौसम में बदलाव की संभावना है। इस दौरान पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। यह स्थितियां प्रदेश के तापमान में गिरावट और ठंड की स्थिति को और बढ़ा सकती हैं।

समग्र रूप से, उत्तराखंड में फरवरी के अंत में मौसम में बदलाव का यह दौर कुछ दिनों तक रहेगा। 26 और 27 फरवरी को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके बाद, 28 फरवरी से मौसम साफ होने के आसार हैं, जिससे तापमान में राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे मौसम के इन बदलावों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी असुविधा से बचने के लिए तैयार रहें। बर्फबारी के कारण पहाड़ी इलाकों में रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है, ऐसे में सुरक्षित यात्रा के लिए सावधान रहना आवश्यक है।

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