प्रदेश सरकार की नई योग नीति में वित्तीय प्रोत्साहन और योग पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रावधान

देहरादून, उत्तराखंड – उत्तराखंड सरकार योग के लिए अवस्थापना विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में नए योग हब बनाने पर वित्तीय प्रोत्साहन देने की तैयारी कर रही है। राज्य की पहली योग नीति में इस पहल का प्रावधान किया जा रहा है। यह नीति पिछले दो साल से तैयार की जा रही थी, और अब इसे अंतिम रूप दिया गया है। योग के क्षेत्र में यह कदम राज्य सरकार द्वारा उठाया जा रहा है ताकि योग पर्यटन और स्वास्थ्य संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
योग नीति का खाका: एक महत्वाकांक्षी पहल
उत्तराखंड की योग नीति का खाका पहले ही तैयार किया गया था, लेकिन कुछ प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई थी। वित्त और विधायी विभाग की सलाह पर नीति को पुनः तैयार किया गया है। आयुर्वेद निदेशालय द्वारा नया प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसे विधायी विभाग ने अनुमोदन के लिए स्वीकृत किया। अब इस नीति को कैबिनेट में रखा जाएगा, और उम्मीद जताई जा रही है कि इसे जल्द ही अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।
इस नई नीति में राज्य में योग पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ध्यान गुफाएं, विपासना केंद्र और योग रिट्रीट बनाने के लिए नियम और दिशा-निर्देश भी तैयार किए जाएंगे। इससे राज्य में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और योग के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की ओर एक नया कदम बढ़ाया जाएगा।
वित्तीय प्रोत्साहन: योग हब का निर्माण
राज्य सरकार नए योग हब बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने की योजना बना रही है। यह प्रोत्साहन उन संस्थाओं और व्यक्तियों को मिलेगा जो योग के प्रचार-प्रसार के लिए अवस्थापना विकास में योगदान देंगे। इस योजना के अंतर्गत, राज्य सरकार उन क्षेत्रों में वित्तीय मदद देगी, जहां योग केंद्र और रिट्रीट स्थापित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में योग के अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाओं का निर्माण करना है, जिससे न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पर्यटकों को भी योग के लाभ प्राप्त हों। विशेष रूप से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में, जहां प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का वातावरण है, योग केंद्रों का निर्माण होने से योग पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा।
विद्यालयों में योग और ध्यान को बढ़ावा
नई नीति में विद्यालयों में योग और ध्यान को पाठ्येतर गतिविधियों के रूप में शामिल करने की योजना बनाई गई है। यह कदम युवा पीढ़ी में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए उठाया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में योग के अभ्यास से विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक स्थिति को संतुलित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ावा देगा, जिससे छात्रों की शिक्षा और समग्र विकास में भी सुधार होगा।
योग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान
प्रदेश सरकार ने योग के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाने का भी प्रस्ताव किया है। इन अभियानों का उद्देश्य भारत और विदेशों में उत्तराखंड को योग के रूप में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना है। 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले योग के प्रचार के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इस अभियान के माध्यम से योग को एक जीवनशैली के रूप में पेश किया जाएगा और इसे प्रदेश के हर कोने तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य में योग से जुड़ी गतिविधियों और स्थानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रस्तुत किया जाएगा। इससे उत्तराखंड में योग के प्रचार को और अधिक बल मिलेगा, और राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बनेगा।
ध्यान गुफाएं, विपासना केंद्र और योग रिट्रीट
नई योग नीति में ध्यान गुफाओं और विपासना केंद्रों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। इन केंद्रों का उद्देश्य उन लोगों के लिए होगा, जो गहरी मानसिक शांति और आत्मा के संपर्क में आना चाहते हैं। प्रदेश में स्थित पहाड़ी क्षेत्रों और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थानों को ध्यान केंद्रों और विपासना गुफाओं के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा, योग रिट्रीट की स्थापना की जाएगी, जहां लोग योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली की शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल न केवल राज्य की पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देगी, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी फैलाएगी।
21 जून को लागू करने की योजना
उत्तराखंड सरकार की योजना है कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले इस नीति को लागू कर दिया जाए। यह दिन योग के महत्व और इसके लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पूरी दुनिया में मनाया जाता है, और उत्तराखंड इसे एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखता है। सरकार का लक्ष्य है कि इस दिन तक योग नीति लागू हो, ताकि योग के महत्व को प्रदेश भर में प्रोत्साहित किया जा सके।