Uttarakhand

उत्तराखंड में लॉन्च हुआ समान नागरिक संहिता पोर्टल, आईटीडीए ने सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं में की खास तैयारी

उत्तराखंड राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने इस संबंध में एक अत्याधुनिक पोर्टल तैयार किया है, जिसे 30 हजार से अधिक यूजर एक साथ प्रयोग कर सकेंगे। इस पोर्टल की विशेषता यह है कि इसे साइबर सुरक्षा के उच्चतम मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है और यह नेशनल डाटा सेंटर से जुड़ा हुआ है।

यूसीसी पोर्टल का उद्देश्य और महत्व

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत राज्य सरकार का उद्देश्य विभिन्न समुदायों और धर्मों के बीच समान नागरिक कानून लागू करना है। इससे नागरिकों को समान अधिकार और न्याय मिल सकेगा, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी भारतीय नागरिकों के लिए समान कानून लागू हो, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंधित हों। इस पोर्टल के माध्यम से, लोग यूसीसी से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही इस कानून से जुड़ी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

सुरक्षा मानकों पर जोर

इस पोर्टल के लॉन्च से पहले आईटीडीए ने इसकी सुरक्षा और तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया है। नितिका खंडेलवाल, आईटीडीए की निदेशक ने जानकारी दी कि वेबसाइट को दो बार सुरक्षा ऑडिट से गुजरना पड़ा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि साइट को किसी भी प्रकार के साइबर हमले से बचाया जा सके। “वेबसाइट को सुरक्षा की दृष्टि से नेशनल डाटा सेंटर पर होस्ट किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि साइबर हमलों की स्थिति में भी साइट पर कोई असर नहीं होगा,” खंडेलवाल ने बताया।

इस वेबसाइट के सभी कोड्स और प्रोग्रामिंग को भी रिव्यू किया गया है, और यह मौजूदा सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया गया है। इसके अलावा, साइट के भीतर अत्याधुनिक सुरक्षा उपायों को लागू किया गया है, जिससे यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखा जा सके।

लोड टेस्टिंग और यूजर ट्रायल

एक प्रमुख चिंता का विषय यह था कि भविष्य में यूसीसी पोर्टल पर यूजर्स की संख्या बढ़ सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए, आईटीडीए ने लोड टेस्टिंग की योजना बनाई। पोर्टल की ट्रायल रनिंग में यह देखा गया कि एक समय में 30 हजार से अधिक यूजर भी इस पर बिना किसी समस्या के लॉग इन कर सकते हैं। यानी इस पोर्टल की प्रोसेसिंग स्पीड अत्यधिक उच्च है, और यह बहुत कम समय में यूजर्स के अनुरोधों को पूरा कर सकता है।

“हमने डेमो यूजर आईडी बनाकर इस पोर्टल की ट्रायल की, और यह पूरी तरह से सफल रहा। इस परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि साइट पर 30 हजार से अधिक यूजर एक साथ भी लोड कर सकते हैं, और वेबसाइट बिल्कुल सही ढंग से काम करती रहेगी,” नितिका खंडेलवाल ने कहा।

पोर्टल की तकनीकी क्षमताएं

यूसीसी पोर्टल की प्रोसेसिंग स्पीड को लेकर भी आईटीडीए ने खास ध्यान दिया है। एक बार यूजर का डेटा प्रोसेस होने के बाद उसे तुरंत ट्रैक किया जा सकता है। वेबसाइट की प्रोसेसिंग गति इतनी तेज है कि यूजर्स के लिए यह काफी सहज और तेज अनुभव प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, साइट की संरचना को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वह बढ़ते हुए ट्रैफिक को संभालने के लिए पूरी तरह से सक्षम हो।

भविष्य में पोर्टल का प्रभाव

इस पोर्टल की लॉन्चिंग से यह उम्मीद की जा रही है कि यूसीसी के बारे में जन जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों के लिए इस कानून की जानकारी हासिल करना आसान होगा। यह पोर्टल नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में सूचित करने, सवालों का समाधान देने और संबंधित प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद करेगा।

इसके अलावा, जब राज्य में यूसीसी लागू होगा, तो यह पोर्टल उन लोगों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संसाधन बनेगा, जो कानून के तहत अपने अधिकारों के लिए आवेदन करना चाहते हैं। नागरिकों को अपने व्यक्तिगत विवरण जमा करने और अपनी स्थिति का पालन करने के लिए एक सहज और सुरक्षित माध्यम मिलेगा।

वेबसाइट के संचालन में आईटीडीए की भूमिका

आईटीडीए ने इस परियोजना पर बहुत काम किया है और तकनीकी सहायता की पूरी व्यवस्था की है। पोर्टल के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए टेक्निकल हेल्प डेस्क बनाई गई है, जो किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या समस्या को शीघ्र सुलझाने का कार्य करेगी। हेल्प डेस्क द्वारा यूजर्स को किसी भी समस्या का समाधान तुरंत प्रदान किया जाएगा, जिससे वेबसाइट की कार्यक्षमता बनी रहेगी और कोई भी यूजर बिना परेशानी के अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा।

समग्र सुरक्षा उपाय

समान नागरिक संहिता पोर्टल को हैकिंग और साइबर अपराधों से बचाने के लिए वेबसाइट पर पूरी तरह से एन्क्रिप्शन, सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन और अन्य सुरक्षा उपायों को लागू किया गया है। पोर्टल के हर पेज को साइबर हमलों से बचाने के लिए निगरानी की जा रही है, जिससे वेबसाइट पर किसी भी प्रकार का आंतरिक या बाहरी खतरा पैदा न हो सके।

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