Uttarakhand

UTTARAKHAND : मलारी हाईवे पर चट्टान गिरने से बीआरओ का 52 फीट लंबा पुल टूटा, सीमावर्ती इलाकों में आवागमन बंद

चमोली जिले के मलारी हाईवे के पास एक और गंभीर दुर्घटना हुई, जब एक विशाल चट्टान पहाड़ी से गिरकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित 52 फीट लंबा पुल तोड़ दिया। यह पुल भाप कुंड के समीप पनघटी नाले के ऊपर बना था, और इसका टूटना स्थानीय जनता के लिए बड़ी समस्या का कारण बन गया है। इस हादसे के बाद सीमावर्ती इलाकों में आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है।

दुर्घटना का विवरण:

बीआरओ का 52 फीट लंबा पुल, जो भाप कुंड के पास पनघटी नाले पर बना था, अचानक एक बड़ी चट्टान के गिरने से टूटकर ढह गया। यह घटना लोगों के लिए आश्चर्यजनक और खतरनाक साबित हुई, क्योंकि यह पुल कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ता था। पुल के टूटने से, न केवल स्थानीय लोग बल्कि पर्यटक और व्यापारी भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह मार्ग पहले से ही पहाड़ी इलाकों के कठिन रास्तों के कारण जोखिमपूर्ण था, लेकिन अब पुल के गिरने से और भी जटिल हो गया है।

चमोली जिले में इस पुल के गिरने से सीमावर्ती इलाकों की महत्वपूर्ण यात्रा मार्गों पर असर पड़ा है। इस सड़क से जुड़ी हुई कई पहाड़ी और नदियों के बीच की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद, यह स्पष्ट है कि राज्य और केंद्र सरकार को इस संकट को हल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

बीआरओ का बयान और भविष्य की योजना

बीआरओ के अधिकारियों ने घटना के तुरंत बाद एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वे जल्द ही मौके पर पहुंचकर वैली ब्रिज का निर्माण करेंगे। उनका कहना है कि यह अस्थायी पुल के रूप में काम करेगा ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। इसके अलावा, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि आगे की समस्याओं से बचा जा सके।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित रहा है, और अब इस दुर्घटना ने एक बार फिर से स्थानीय प्रशासन की तैयारियों को चुनौती दी है। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य जल्द शुरू किया जाएगा, लेकिन इसके लिए समय की आवश्यकता होगी।

पिछला हादसा: गोविंदघाट में चट्टान गिरने से पुल ध्वस्त

चमोली जिले में पुलों और सड़क नेटवर्क की स्थिति एक बार फिर से संकट में पड़ी, जब 5 मार्च को गोविंदघाट में एक और भूस्खलन हुआ। इस बार पहाड़ी से एक विशाल चट्टान टूटकर अलकनंदा नदी पर बने मोटर पुल पर गिर गई। यह पुल ध्वस्त होकर नदी में समा गया, जिससे पुलना गांव, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी का संपर्क पूरी तरह से कट गया।

गोविंदघाट में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर दीं। पुल के गिरने से न केवल स्थानीय यातायात प्रभावित हुआ, बल्कि कई तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

यह हादसा इस क्षेत्र में निरंतर बढ़ते प्राकृतिक संकटों और भूस्खलन के कारणों को उजागर करता है। पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी और बारिश के दौरान इस तरह के हादसे आम होते जा रहे हैं, और राज्य सरकार को इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

मलबे में एक व्यक्ति की मौत, राहत कार्य जारी

इस घटना में मलबे के नीचे दबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया, जिसमें एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, लोनिवि की टीमें और स्थानीय प्रशासन शामिल हैं। इस तरह की घटनाओं में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की आवश्यकता होती है ताकि किसी और की जान को खतरा न हो और प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द मदद मिल सके।

तहसील प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों में तेजी से काम किया। प्रशासन ने आस-पास के क्षेत्रों में भी चेतावनी जारी की है, ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें और किसी अन्य आपदा से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों की समस्याएं और राज्य सरकार से अपेक्षाएं

यह हादसा स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुश्किलें लेकर आया है। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करना पहले से ही कठिन था, और अब पुलों के टूटने से समस्या और बढ़ गई है। कई दूरदराज क्षेत्रों के लोग फंसे हुए हैं और उन्हें जरूरी सेवाओं का आभाव हो रहा है।

स्थानीय निवासी लगातार राज्य सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा, मलबा और चट्टानों को स्थिर करने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

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