उत्तराखंड ने 38वें राष्ट्रीय खेलों में इतिहास रचा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खिलाड़ियों से की मुलाकात

उत्तराखंड ने इस वर्ष 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी करके एक नई उपलब्धि हासिल की है। यह ऐतिहासिक खेल आयोजन राज्य के लिए बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस बार राज्य के खिलाड़ियों ने अपनी परफॉर्मेंस से न केवल खुद को साबित किया, बल्कि देशभर में उत्तराखंड का नाम रोशन किया। 38वें राष्ट्रीय खेलों में लगभग 35 खेल स्पर्धाएं हो रही हैं, जिसमें देशभर के करीब दस हजार खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। इन खिलाड़ियों के बीच करीब 3674 पदक खेले जा रहे हैं, और इस दौरान राज्य के विभिन्न खिलाड़ियों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का खिलाड़ियों से संवाद
इस उत्सव के बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने खिलाड़ियों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया और उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। मुख्यमंत्री धामी का यह कदम खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “यह हमारे राज्य के लिए गर्व का पल है कि हम 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी कर रहे हैं। मैं सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि आप सभी अपने राज्य और देश का नाम रोशन करें।”
मुख्यमंत्री के इस कदम से खिलाड़ियों में एक नया उत्साह आया, और वे अब और अधिक मेहनत से अपनी स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों की हर संभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से खेल सकें और सर्वोत्तम परिणाम हासिल कर सकें।
वुशु में उत्तराखंड ने किया शानदार प्रदर्शन
38वें राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत के बाद से ही उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने खासकर वुशु में शानदार प्रदर्शन किया है। इस खेल में राज्य के खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 12 पदक जीते हैं, जिसमें एक स्वर्ण, तीन रजत और आठ कांस्य पदक शामिल हैं। यह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक जीत है, क्योंकि अब तक इतने सारे पदक वुशु खेल में कभी नहीं मिले थे।
इस बार राज्य की खिलाड़ी ज्योति वर्मा ने कांस्य पदक जीतकर राज्य को पहली सफलता दिलाई। इसके बाद अचोम तपस ने स्वर्ण पदक जीता, जिससे राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल दोगुना हो गया। इसके बाद इलाबाम इटाली चानू, फेब्रिस देवी और हर्षित शर्मा ने क्रमशः रजत पदक हासिल किए, जिससे उत्तराखंड ने राष्ट्रीय पदक तालिका में टॉप 11 में अपनी जगह बनाई।
यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पिछले राष्ट्रीय खेलों में, जो 2023 में गोवा में हुए थे, उत्तराखंड को वुशु में केवल एक कांस्य पदक प्राप्त हुआ था, जबकि इस बार राज्य ने वुशु में एक स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते।
उत्तराखंड का वुशु में शानदार प्रदर्शन
वुशु में उत्तराखंड के प्रदर्शन ने अन्य राज्यों को भी हैरान कर दिया है। राज्य के कोच और खिलाड़ियों ने अपने प्रशिक्षण में कठिन मेहनत की है, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। वुशु जैसे तकनीकी और शारीरिक चुनौतीपूर्ण खेल में राज्य के खिलाड़ियों की सफलता ने साबित कर दिया है कि उत्तराखंड के खेलों में अब एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है।
उत्तराखंड के खिलाड़ियों की मेहनत और संघर्ष ने उन्हें यह सफलता दिलाई। राज्य के वुशु प्रशिक्षकों का भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है, जिन्होंने खिलाड़ियों को अपनी ताकत, धैर्य और तकनीकी कौशल पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री धामी का उत्साहवर्धन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खिलाड़ियों से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद देने के लिए तैयार है, ताकि वे अपनी मेहनत और संघर्ष के फलस्वरूप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता हासिल कर सकें। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित किया कि वे केवल पदक जीतने के बारे में न सोचें, बल्कि अपने खेल में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करते रहें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, “हमारा उद्देश्य केवल खेलों में प्रतिस्पर्धा करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे अपनी प्रतिभा को बढ़ा सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें। हमारी सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है।”
उत्तराखंड में खेलों का भविष्य
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में खेलों को लेकर एक नया दृष्टिकोण देखने को मिला है। राज्य सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिनमें खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, इन्फ्रास्ट्रक्चर, और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी यह मानना है कि खेलों को अधिक प्रोत्साहित करना राज्य की युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य की दिशा में प्रेरित कर सकता है।
राज्य सरकार ने खेलों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दिखाने के लिए नए स्टेडियम और प्रशिक्षण केंद्रों का निर्माण किया है, ताकि खिलाड़ियों को सबसे बेहतर सुविधाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से राज्य की खेल संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलता है और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलती है।