Uttarakhand

UTTARAKHAND : पूर्व विधायक और विधायक के बीच विवाद को सुलझाने के लिए किसान नेता राकेश टिकैत की पहल

हरिद्वार: उत्तराखंड के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और खानपुर विधायक उमेश शर्मा के बीच चल रहे विवाद में अब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) टिकैत गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए अपने प्रयास शुरू किए और इसके लिए हरिद्वार का रुख किया। चौधरी राकेश टिकैत ने दोनों पक्षों से मुलाकात कर विवाद सुलझाने की दिशा में काम किया।

किसानों के नेता ने दोनों पक्षों से मुलाकात की

चौधरी राकेश टिकैत ने सबसे पहले जेल में बंद पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन से मुलाकात की, और उनके साथ विवाद की स्थिति पर बातचीत की। इसके बाद, वे डामकोठी स्थित भाजपा नेता और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की पत्नी रानी देवयानी और अन्य समाज के नेताओं से मिले। शाम होते-होते उन्होंने देहरादून में खानपुर विधायक उमेश शर्मा से भी मुलाकात की। इस दौरान, टिकैत ने सभी पक्षों से शांति स्थापित करने और विवाद को सुलझाने के उपायों पर चर्चा की।

टिकैत ने समाजों के बीच विवाद को जातिगत न बनाने की अपील की

पत्रकारों से बातचीत करते हुए, चौधरी राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि यह विवाद जातिगत या समाजिक मतभेदों का नहीं है, बल्कि एक हारे हुए विधायक और जीते हुए विधायक के बीच का निजी विवाद है। उन्होंने दोनों समुदायों, खासकर गुर्जर और ब्राह्मण समाज से अपील की कि वे इस मुद्दे को सामाजिक मुद्दा न बनाएं और न ही पंचायतों के स्तर पर इस पर बात करें। टिकैत ने कहा, “समाज की ओर से इस मामले में जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। समाज को इस विवाद से बाहर रखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में टूटफूट हो सकती है।”

टिकैत ने कहा कि वे इस मामले को सुलझाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे। वे दोनों नेताओं से यह अपील करेंगे कि जो भी घटनाएं पहले हो चुकी हैं, उन्हें खत्म किया जाए ताकि समाज में शांति कायम हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही यह विवाद खत्म हो जाएगा और दोनों नेता राजनीतिक मंच पर अलग-अलग रहकर अपनी-अपनी राह पर चलेंगे, लेकिन सामाजिक मुद्दों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

केंद्र सरकार के बजट पर भी सवाल उठाए

अपने दौरे के दौरान, चौधरी राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार के हाल ही में प्रस्तुत किए गए आम बजट पर भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बजट में कर्ज को बढ़ावा दिया गया है, जोकि देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है। टिकैत ने कहा, “अगर बजट में कर्ज को कम किया जाता और आम जनता, किसान और गरीबों के लिए राहत दी जाती, तो यह अधिक अच्छा होता। इस बजट में किसानों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।”

टिकैत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार केवल पूंजीवाद को बढ़ावा दे रही है और गरीबों तथा किसानों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार को “ठग सरकार” करार दिया और कहा कि इस सरकार ने किसानों को झूठे वादे किए हैं, जो पूरी तरह से अधूरे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि बजट में किसानों के लिए ऋण पर ब्याज दरों में कमी की जाती, तो यह एक सकारात्मक कदम होता। उनका मानना था कि इस तरह के उपाय किसानों के लिए राहत का काम करते और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद मिलती।

विवाद का समाधान: एक प्रयास की शुरुआत

चौधरी राकेश टिकैत के इस कदम को एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह विवाद राजनीतिक है, लेकिन टिकैत ने इसे सामाजिक संघर्ष में तब्दील होने से रोकने के लिए प्रयास किए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के विवादों को राजनीति से बाहर रखा जाना चाहिए, ताकि समाज में सामंजस्य बना रहे।

भाकियू के प्रवक्ता का यह कदम न केवल उत्तराखंड में बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। किसानों और अन्य समुदायों के बीच सामूहिक शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने का उनका यह प्रयास उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जो समाज में बढ़ते हुए तनाव और बंटवारे से चिंतित हैं।

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