उत्तराखंड सरकार का केंद्रीय बजट से जल संरक्षण के लिए विशेष अनुदान की उम्मीद

उत्तराखंड की धामी सरकार राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जल संकट को दूर करने और परंपरागत जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्रीय बजट में विशेष अनुदान की उम्मीद कर रही है। राज्य में सूख चुके झरनों और जलस्रोतों को नया जीवन देने के उद्देश्य से सरकार ने “स्प्रिंग शेड एंड रिवर रिजुवेनेशन प्राधिकरण” (सारा) का गठन किया है, जो जल संरक्षण के अभियान को जमीन पर उतारने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए सरकार को केंद्रीय वित्तीय सहारे की आवश्यकता है, ताकि इन प्रयासों को व्यापक और प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
सारा प्राधिकरण का गठन और जलस्रोतों के पुनर्जीवन की आवश्यकता
उत्तराखंड में जलस्रोतों का महत्त्व बहुत अधिक है, खासकर पर्वतीय इलाकों में, जहां जल का संरक्षण और प्रबंधन जीवन और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। “स्प्रिंग शेड एंड रिवर रिजुवेनेशन प्राधिकरण” (सारा) का गठन राज्य सरकार ने जलस्रोतों के पुनर्जीवित करने के लिए किया है। इस प्राधिकरण के तहत राज्य में हजारों पारंपरिक जलस्रोतों को चिन्हित किया गया है, जिनका पुनर्निर्माण और पुनर्जीवन आवश्यक है।
हालांकि राज्य सरकार ने इस दिशा में खुद के वित्तीय संसाधनों से जलस्रोतों के पुनरोद्धार की शुरुआत कर दी है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण सरकार को सभी जल स्रोतों, झरनों, नालों और खालों को नया जीवन देने के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए सारा प्राधिकरण के तहत विशेष केंद्रीय सहायता देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार का मानना है कि राज्य के जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन केंद्र सरकार से मिल सकते हैं, जिससे जल संरक्षण के प्रयासों को गति मिल सकेगी और सूखा, जल संकट जैसी समस्याओं का समाधान हो सकेगा।
जल जीवन मिशन: राज्य सरकार की नई प्राथमिकता
जल जीवन मिशन, जो केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, का उद्देश्य प्रत्येक घर में पीने का पानी पहुंचाना है। उत्तराखंड में इस योजना की डेडलाइन 31 मार्च 2025 तक निर्धारित की गई है, लेकिन राज्य सरकार ने इस समयसीमा को बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की है। इसके तहत कई योजनाओं के प्रस्ताव अभी भी गतिमान हैं और उन्हें पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी।
राज्य सरकार जल जीवन मिशन के तहत पंपिंग योजनाओं के रखरखाव और संचालन के लिए भी केंद्रीय सहायता की मांग कर रही है। खासकर राज्य में ग्रेविटी स्कीमों के मुकाबले पंपिंग स्कीमों पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसके कारण योजना के संचालन में अधिक खर्च बढ़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि यह अतिरिक्त खर्च राज्य के संसाधनों पर दबाव बना रहा है, और इसलिए इस खर्च को केंद्र पोषित योजना के तहत लाया जाना चाहिए, जैसे पीएमजीएसवाई (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) के तहत संचालन किया जाता है।
सौंग बांध परियोजना: भूजल संरक्षण के लिए विशेष योजना
उत्तराखंड में भूजल स्तर में गिरावट एक गंभीर समस्या बन चुकी है, खासकर राज्य के तराई और मैदानी क्षेत्रों में। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 2500 करोड़ रुपये की लागत से सौंग बांध परियोजना शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य भूजल स्तर को स्थिर करना और जल संकट का समाधान करना है। परियोजना को “स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट” (एसएसीआई) के तहत वित्तीय मंजूरी प्राप्त है, लेकिन सरकार का कहना है कि परियोजना के लिए आवंटित धनराशि बहुत सीमित है।
राज्य सरकार का तर्क है कि भूजल स्तर में आ रही गिरावट को देखते हुए इस परियोजना का समय पर पूरा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि इस परियोजना को केंद्र पोषित योजना में शामिल किया जाए, ताकि परियोजना को और अधिक वित्तीय सहयोग मिल सके और इसका समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
केंद्रीय बजट पर राज्य सरकार की निगाहें
एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होने की संभावना जताई जा रही है, और इस पर राज्य सरकार की निगाहें टिकी हैं। राज्य सरकार ने पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक में सारा प्राधिकरण और अन्य जल संरक्षण योजनाओं के लिए विशेष सहायता की मांग की है। राज्य सरकार का कहना है कि जल संरक्षण राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए केंद्रीय वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य केंद्रीय बजट से जल संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक वित्तीय सहायता की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि राज्य में जलस्रोतों के पुनर्जीवन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
जल संरक्षण को लेकर राज्य सरकार की दीर्घकालिक योजना
उत्तराखंड सरकार की जल संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक योजना स्पष्ट है। सारा प्राधिकरण, जल जीवन मिशन, और सौंग बांध परियोजना जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार जल संकट के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हर घर में पीने का पानी पहुंचाने के लक्ष्य को भी प्राथमिकता दी है।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा जलस्रोतों और नदियों के पुनर्जीवित करने के लिए पारंपरिक जलस्रोतों की पहचान कर उन्हें पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। यह कदम न केवल राज्य के जल संकट को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी लाभकारी साबित होगा।