Uttarakhand

उत्तराखंड सरकार ने बजट निर्माण के लिए जनता से सुझाव मांगे “जनता का बजट, जनता के द्वारा”

प्रदेश सरकार ने एक बार फिर बजट निर्माण में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल की है। उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि इस बार का बजट “जनता का बजट, जनता के द्वारा, जनभावनाओं के अनुरूप बनेगा बजट हमारा” के स्लोगन के तहत तैयार किया जाएगा। इसके लिए, प्रदेश की जनता से वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट पर सुझाव मांगे गए हैं।

जनता से बजट निर्माण में भागीदारी की अपील

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने बजट निर्माण प्रक्रिया में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पहले ही एक परंपरा शुरू की है। अब इस परंपरा को और मजबूत करते हुए, प्रदेश के नागरिकों से वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट निर्माण के लिए विचार-विमर्श और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि 31 जनवरी को राजपुर रोड स्थित एक होटल में हितधारकों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस संवाद सत्र में, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, समाजिक और व्यावसायिक संगठन, और अन्य हितधारी अपनी राय और सुझाव साझा कर सकेंगे। इसके अलावा, सरकार ने ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा भी सुझाव प्राप्त करने की व्यवस्था की है, जिससे लोग अपनी राय सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे।

संवाद का आयोजन और सुझाव भेजने के तरीके

वित्त मंत्री ने बताया कि जनता के सुझाव और विचार 9 फरवरी 2025 तक भेजे जा सकते हैं। इसके लिए, राज्य सरकार ने एक विशेष फोन नंबर (9520820683) और ईमेल ([email protected]) जारी किए हैं। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति या संगठन अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत कर सकता है। यह कदम राज्य सरकार के लिए बजट निर्माण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जनहितैषी बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इसके साथ ही, सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने इस बात की पुष्टि की कि जनभावना के अनुरूप बजट तैयार करने के लिए जन संवाद का आयोजन भी किया जा रहा है। इस बार का जन संवाद देहरादून में होगा, जिसमें प्रदेश भर के हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस संवाद सत्र में, वित्तीय योजनाओं और विकास योजनाओं को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और आम नागरिकों से व्यापक चर्चा की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बजट में प्रदेशवासियों की वास्तविक जरूरतों और आकांक्षाओं का ध्यान रखा जाए।

“जनता का बजट” का उद्देश्य

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास न केवल बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का है, बल्कि इसे लोगों के वास्तविक मुद्दों के हिसाब से तैयार करने का भी है। मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि बजट को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने के लिए, उनकी प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

यही कारण है कि सरकार ने बजट बनाने की प्रक्रिया में जनभागीदारी को अनिवार्य किया है। इस पहल के तहत, समाज के हर वर्ग, जैसे कि किसान, श्रमिक, व्यापारी, महिलाएं, युवा, और अन्य समाजिक संगठन, अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को सरकार के सामने रख सकेंगे। इसके अलावा, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें आमतौर पर बजट में पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।

क्षेत्रीय जरूरतों को प्राथमिकता

उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है, जहाँ की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधताएं बजट निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बना देती हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की आवश्यकताएं और प्राथमिकताएं हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर जिले और हर समुदाय के सुझावों को बजट में समाहित किया जाए।

राज्य के ग्रामीण इलाकों, दूरदराज क्षेत्रों और पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी और सुविधाओं की समस्या प्रमुख मुद्दे हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, जल आपूर्ति, और बिजली की समस्याओं को दूर करने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए जाएंगे। इसके अलावा, पर्यटन, कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बजट प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही

उत्तराखंड सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का बजट पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह होगा। मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री ने कहा है कि जो भी सुझाव आएंगे, उन्हें पूरी गंभीरता से सुना जाएगा, और जिन सुझावों को व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकता है, उन्हें बजट में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार हर कदम पर जन संवाद और जनभागीदारी को प्राथमिकता देगी, ताकि बजट तैयार करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।

सरकार का उद्देश्य यह है कि प्रदेश के सभी नागरिकों को यह महसूस हो कि उनका बजट है और यह उनके द्वारा तैयार किया गया है। इसके साथ ही, यह बजट प्रदेश के समग्र विकास और सामाजिक-आर्थिक सुधार में सहायक साबित हो।

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