उत्तराखंड के पैरा शूटिंग कोच सुभाष राणा को मिला प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड

उत्तराखंड के नैनबाग क्षेत्र के चिलामू गांव निवासी सुभाष राणा को उनके उत्कृष्ट योगदान और समर्पण के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजा। यह सम्मान उत्तराखंड के खेल क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्यभर में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है। सुभाष राणा ने पैरा शूटिंग कोच के रूप में न केवल देश का नाम रोशन किया, बल्कि उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में अपने खिलाड़ियों के मार्गदर्शन से पांच पदक दिलवाए, जिससे उनके योगदान को बखूबी सराहा गया है।
उत्तराखंड के सुभाष राणा को द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलने से प्रदेशवासियों में खुशी की लहर है। यह अवॉर्ड उन्हें पैरा शूटिंग कोच के रूप में उनके असाधारण योगदान और संघर्ष के लिए दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुभाष राणा को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया, और यह सम्मान उत्तराखंड के लिए गर्व की बात बन गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, खेल मंत्री रेखा आर्या और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने सुभाष राणा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी और उनके कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा, “देवभूमि के निवासी सुभाष राणा को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाना हमारे लिए गर्व का क्षण है। इस सम्मान से न केवल उन्हें, बल्कि पूरे राज्य को गर्व महसूस हो रहा है। हम उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।”
सुभाष राणा का व्यक्तिगत सफर और खेलों में योगदान
सुभाष राणा का जीवन एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो कठिनाइयों के बावजूद सफलता की ऊँचाइयों को छूने का प्रतीक है। सुभाष राणा उत्तराखंड के नैनबाग क्षेत्र के चिलामू गांव के निवासी हैं और उनका संबंध एक सामान्य परिवार से था। उनके खेल के प्रति प्रेम ने उन्हें एक कोच के रूप में पहचान दिलाई। राणा ने खुद भी खेलों में भाग लिया और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उन्होंने साल 1994 में इटली और 1998 में स्पेन में आयोजित विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया। उनके खेलों में भाग लेने का अनुभव ही उन्हें कोच बनने के लिए प्रेरित करने वाला साबित हुआ।
उन्होंने अपनी कोचिंग यात्रा की शुरुआत देश के पैरा शूटिंग खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करके की। उनके मार्गदर्शन में कई पैरा शूटिंग खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते।
टोक्यो पैरालंपिक 2020 में सफलता
सुभाष राणा की कोचिंग में टीम ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। इस टीम ने पैरालंपिक खेलों में पांच मेडल जीते, जिसमें स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक शामिल थे। राणा के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और समर्पण से देश का नाम रोशन किया। यह सफलता सुभाष राणा के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, और यह उनके कोचिंग करियर के सबसे यादगार क्षणों में से एक था।
सुभाष राणा की कोचिंग शैली की विशेषता यह थी कि वे हर खिलाड़ी के व्यक्तिगत स्तर पर ध्यान देते थे और उनकी कमजोरियों को समझकर उन्हें सुधारने के लिए काम करते थे। उनका मानना था कि मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास खिलाड़ियों को मुश्किल परिस्थितियों से उबार सकता है। यही कारण था कि उनके मार्गदर्शन में खिलाड़ी न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत होते थे।
सुभाष राणा का योगदान: पैरा शूटिंग को नया मुकाम
पैरा शूटिंग कोच के रूप में सुभाष राणा का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश के पैरा खिलाड़ियों को न केवल तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी तैयार किया। उनका मानना था कि हर खिलाड़ी के पास अपनी विशेष क्षमताएं होती हैं और वे सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
सुभाष राणा ने अपनी कोचिंग में खिलाड़ियों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझते हुए उन्हें उच्चतम स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार किया। उनके लिए यह केवल खेल की कोचिंग नहीं थी, बल्कि यह एक मिशन था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाड़ियों को उनके लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उनका यह समर्पण ही था जिसने उन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिलवाया।
उत्तराखंड का गर्व: सुभाष राणा की उपलब्धियां
सुभाष राणा की इस उपलब्धि ने उत्तराखंड को खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाई है। उनके द्वारा अर्जित किए गए पुरस्कारों और उपलब्धियों ने राज्य के खेल क्षेत्र को और भी मजबूत किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “उत्तराखंड के सपूत सुभाष राणा ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस कराया है। उनका यह सम्मान उत्तराखंड के खेलों के क्षेत्र में एक नई शुरुआत का प्रतीक है।”
सुभाष राणा की उपलब्धि को लेकर उत्तराखंड के खेल मंत्री रेखा आर्या ने भी खुशी जताई और कहा, “यह राज्य के लिए एक गर्व का क्षण है। सुभाष राणा ने न केवल पैरा शूटिंग में शानदार प्रदर्शन किया है, बल्कि उन्होंने पैरा खिलाड़ियों को सफलता के नए आयाम तक पहुंचाया है।”
सुभाष राणा की कोचिंग में सफलता की कहानी
सुभाष राणा का कोचिंग करियर न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफल रहा है। उनके मार्गदर्शन में कई युवा पैरा शूटिंग खिलाड़ी ने अपनी पहचान बनाई और उन्हें वैश्विक मंच पर सफलता हासिल हुई। उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ियों ने न केवल पैरालंपिक खेलों में पदक जीते, बल्कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से दुनिया को यह दिखाया कि पैरा खिलाड़ी किसी भी सामान्य खिलाड़ी से कम नहीं होते।
उनकी कोचिंग में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हर खिलाड़ी की ताकत को पहचाना जाए और उसे सही दिशा में प्रशिक्षित किया जाए। उनके मार्गदर्शन में, खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास, समर्पण और मेहनत की मिसाल पेश की। यह उनके योगदान की सबसे बड़ी पहचान है।