Uttarakhand

स्मार्ट बिजली मीटर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज, राजनीतिक करंट हुआ ज्यादा

उत्तराखंड में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर राजनीतिक हलकों में जमकर तू-तू मैं-मैं हो रही है। किच्छा के कांग्रेस विधायक ने हाल ही में स्मार्ट मीटर तोड़कर विरोध जताया, जिसके बाद यह मुद्दा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेशभर में गर्मा गया है। कांग्रेस के कई अन्य नेता भी उनके समर्थन में उतर आए, जबकि भाजपा ने कांग्रेस के इस रवैये पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस का स्मार्ट मीटर विरोधी रवैया बिजली चोरी रोकने में बाधक बन रहा है और यह उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।

किच्छा विधायक का विरोध

किच्छा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक ने हाल ही में स्मार्ट बिजली मीटर तोड़कर प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि स्मार्ट मीटरों के कारण आम जनता की समस्याएं बढ़ेंगी, क्योंकि ये मीटर उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक बिजली खपत के मुकाबले अधिक बिल दिखाते हैं। इसके विरोध में उन्होंने स्मार्ट मीटर को सार्वजनिक रूप से तोड़ दिया और सरकार से इसका विरोध किया।

कांग्रेस विधायक के इस कदम के बाद, कांग्रेस पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी उनका समर्थन किया और राज्य सरकार की आलोचना की। कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटरों के जरिए सरकार आम जनता पर दबाव डाल रही है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से परेशानियों का कारण बन सकता है।

भाजपा का पलटवार

इस पर भाजपा ने बुधवार को तीखा पलटवार किया और कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर का विरोध केवल राजनीति से प्रेरित है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस का स्मार्ट मीटर विरोधी रवैया बिजली चोरी रोकने के प्रयासों में रुकावट डाल रहा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों के जरिए बिजली की खपत की सही जानकारी मिलती है, जिससे उपभोक्ता अपनी खपत के अनुसार बिजली का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कदम न केवल बिजली चोरी को रोकने में मदद करेगा बल्कि राज्य के बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को भी सुधारने में सहायक होगा।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में स्मार्ट मीटर पहले से लगाए जा चुके हैं, और वहां पर इसका विरोध नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर स्मार्ट मीटर से समस्या होती, तो ये राज्य इस तकनीक को लागू नहीं करते।

स्मार्ट मीटर के फायदे

भाजपा का कहना है कि स्मार्ट मीटर न केवल उपभोक्ताओं को वास्तविक बिजली खपत का सही आंकड़ा प्रदान करेगा, बल्कि इसे लेकर कई अन्य फायदे भी हैं। मनवीर सिंह चौहान ने कहा, “स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की जानकारी ऑनलाइन मिलती है, जिससे वे अपनी खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा, बिजली के उपयोग की तुलना भी की जा सकती है, जिससे लोगों को अपनी आदतों को सुधारने में मदद मिल सकती है।”

उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों से यह भी सुनिश्चित होगा कि बिलिंग में कोई गड़बड़ी नहीं होगी और उपभोक्ता केवल उतनी बिजली का भुगतान करेंगे, जितनी उन्होंने वास्तव में खपत की होगी।

चौहान ने आगे कहा कि देशभर में लगभग 20 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने की मंजूरी दी गई है और अब तक 55 लाख से अधिक स्मार्ट कनेक्शन लगाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्मार्ट मीटर की मदद से उपभोक्ताओं को बिजली की खपत के बारे में रियल-टाइम जानकारी प्राप्त होगी, और यह उन्हें अपनी खपत के अनुसार बिल का भुगतान करने में मदद करेगा।

कांग्रेस का नजरिया

कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के जवाब को एकतरफा और जनता के हितों के खिलाफ बताया। कांग्रेस के नेता यह मानते हैं कि स्मार्ट मीटर आम लोगों के लिए एक बोझ साबित हो सकता है, क्योंकि इससे बिजली के बिलों में अचानक वृद्धि हो सकती है। उनका कहना था कि स्मार्ट मीटर से आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा और यह राज्य के गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार स्मार्ट मीटरों के जरिए राज्य के लोगों के साथ एक और धोखा करने जा रही है, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार को स्मार्ट मीटर की बजाय बिजली दरों में कमी करनी चाहिए और जनता को राहत देनी चाहिए।

राज्य में बिजली चोरी पर रोक

स्मार्ट मीटर का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी पर रोक लगाना भी है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बिजली चोरी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी के कारण राज्य के बिजली वितरण नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है। स्मार्ट मीटर की मदद से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बिजली की खपत सही तरीके से मापी जाए और कोई भी अनधिकृत खपत न हो।

इसके अलावा, स्मार्ट मीटरों से बिजली की खपत की सही जानकारी प्राप्त करने से बिजली वितरण कंपनियों को भी अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यह मीटर बिजली के ट्रांसफॉर्मर और अन्य उपकरणों की स्थिति की जानकारी भी प्रदान करते हैं, जिससे समय रहते किसी भी तकनीकी खराबी का पता लगाया जा सकता है।

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