महिला सशक्तीकरण योजनाओं का होगा ऑडिट, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने दिया निर्देश

उत्तराखंड राज्य में महिला सशक्तीकरण से जुड़ी सभी योजनाओं का ऑडिट किया जाएगा। यह कदम उठाया गया है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि कौन से विभाग की योजनाएं सही तरीके से लागू हो रही हैं और कौन सी योजनाएं अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रही हैं। राज्य की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अधिकारियों से महिला योजनाओं के लाभार्थियों की सटीक जानकारी भी तलब की गई है।
महिला एवं बाल विकास समिति की बैठक में मुख्य सचिव का अहम निर्देश
शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड महिला एवं बाल विकास समिति की बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने महिला सशक्तीकरण की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में राधा रतूड़ी ने अधिकारियों से पूछा कि अब तक कितनी महिलाओं को इन योजनाओं से लाभ हुआ है और यह आंकड़े किस हद तक सही हैं। इस दिशा में यह निर्णय लिया गया है कि सभी योजनाओं का प्रदर्शन ऑडिट कराया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सी योजनाओं का प्रभाव लक्षित वर्ग पर पड़ा है और कौन सी योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से यह भी कहा कि योजनाओं के गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता हो सकती है, और इसके लिए विभागीय योजनाओं का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने योजनाओं के लक्षित वर्ग पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर उनमें सुधार करने की सलाह दी।
अधिकारियों को प्रभावी मूल्यांकन करने की हिदायत
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस ऑडिट प्रक्रिया के तहत सचिव स्तर पर इन योजनाओं के नए ड्राफ्ट पर कार्य करने की जिम्मेदारी निर्धारित की है। उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वे योजनाओं के लाभार्थियों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी मूल्यांकन करें।
उन्होंने महिला सशक्तीकरण और बाल विकास से जुड़े विभागों को यह भी निर्देश दिया कि वे मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना और अन्य विभागों द्वारा चलाए जा रहे महिला आजीविका योजनाओं को एकत्रित करके उनके समग्र प्रभाव का मूल्यांकन करें।
बालिका शिक्षा और स्वच्छता को लेकर नए कदम
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मेधावी छात्राओं के लिए देशभर में शैक्षिक भ्रमण की योजना पर भी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस योजना को लागू करने के लिए अधिकारियों से सुझाव भी मांगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बालिकाओं के बीच शिक्षा को लेकर जागरूकता और अवसर बढ़े।
साथ ही, उन्होंने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं के मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही। राधा रतूड़ी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से सैनेटरी नैपकिन वितरण योजना को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि यह कार्ययोजना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और इसे प्राथमिकता से लागू किया जाना चाहिए।
एनीमिया उन्मूलन अभियान को जन अभियान बनाने का आदेश
मुख्य सचिव ने महिलाओं के लिए एनीमिया उन्मूलन अभियान को जन अभियान बनाते हुए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं में एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए समाज के हर वर्ग को जोड़ने की जरूरत है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला सशक्तीकरण विभाग को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि इस अभियान को राज्यभर में फैलाने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि महिलाएं अपनी सेहत के प्रति जागरूक हो सकें और एनीमिया की समस्या को रोकने के लिए ठोस कदम उठा सकें।
बैठक में शामिल अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में महिला एवं बाल विकास सचिव चंद्रेश यादव, विनय शंकर पांडेय, नीरज खैरवाल और अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में किए गए निर्णयों को लेकर अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और उनका लाभ सीधे तौर पर महिलाओं और बालिकाओं तक पहुंचे।
राज्य में महिला सशक्तीकरण की दिशा में उठाए गए कदम
उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन हो रहा है। इन योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में काम किया है। इसके अलावा, बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला सुरक्षा और महिलाओं के लिए रोजगार अवसरों की दिशा में कई योजनाएं लागू की गई हैं।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी द्वारा योजनाओं का ऑडिट करने का निर्णय इस बात का संकेत है कि सरकार महिला सशक्तीकरण के कार्यों को और प्रभावी बनाना चाहती है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य में महिला सशक्तीकरण की योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो और महिलाओं को अधिक से अधिक लाभ मिले।